Дишаб ба ёд рӯй ту эй рашки офтоб
دیشب به یاد روی تو ای رشک آفتاب
Шастами зи сайли ашки ман аз дидаи нақши хоб
شُستم ز سیلِ اشک من از دیده نقشِ خواب
То субҳдам ки ҷайби уфуқ чок зад шафақ
تا صبحدم که جیب افق چاک زد شفق
Сад ранги рехти дил ба хаёли рахт бар об
صد رنگ ریخت دل به خیال رُخَت بر آب
Бинишастаам миёнаи сайлоби хӯн ки гар
بنشستهام میانهٔ سیلابِ خون که گر
Бинии гумони барӣ ки ҳубобӣаст рӯй об
بینی گمان بری که حبابی است روی آب
Шуд масти дили зи ғамзаи ?ути он сон ки мастӣ аш
شد مست دل ز غمزهات آن سان که مستیاش
Афзӯн буд зи нашъаи як хами шароби ноб
افزون بُوَد ز نشئهٔ یک خُم شرابِ ناب
Чашмат ба зирчшмӣ бо як ишора кард
چشمت به زیرچشمی با یک اشاره کرد
Дар ҳар куҷо дилӣаст тарафдори инқилоб
در هر کجا دلی است طرفدار انقلاب
Маҳрӯм шуд з рӯй ту зоҳид , ҳамеша бод
محروم شد ز روی تو زاهد، همیشه باد
Маҳрӯми зи остини хатои домани савоб
محروم ز آستین خطا دامن صواب
Бо хонаи харобаи дили ончиро ки кард
با خانهٔ خرابهٔ دل آنچه را که کرد
Чашмат , ба каъба он накунад пайрави ваҳоб
چشمت، به کعبه آن نکند پیرو وهاب
Афтод турра бар сари мижгонат огаҳ аст
افتاد طُرّه بر سر مژگانت آگه است
Гунҷишки аўФтодаҳ ба сарпанҷаи уқоб
گنجشک اوفتاده به سرپنجهٔ عقاب
Аз маҳвашони шафақ чу туро интихоб кард
از مهوشان شفق چو تو را انتخاب کرد
Табрик гуфт ориф аз ин ҳасани интихоб
تبریک گفت عارف از این حُسنِ انتخاب