Орифи банно ба ончӣ дар девонаши навиштаи ин таснифро пас аз ҷудоӣ аз « дӯсти вафодораш » устоди алии Муҳамади мъморбош , байни Қуму Исфаҳон сохтааст ( соли 1329 ҳ . қ ) .

عارف بنا به آنچه در دیوانش نوشته این تصنیف را پس از جدایی از «دوست وفادارش» استاد علی‌محمد معمارباش،  بین قم و اصفهان ساخته است (سال ۱۳۲۹ ه.ق).

Аз кафами раҳо , шуд қарори дил

از کفم رها‌، شد قرار دل

Нест дасти ман , ихтиёри дил

نیست دست من، اختیار دل

Ҳизу ҳарзаи гирд , зиди аҳли дард

هیز و هرزه‌گرد، ضدّ اهل درد

Гашта зин дар он дар мадори дил

گشته زین در آن در مدارْ دل

Бешарафтар аз дили мҷу ки нест

بی‌شرف‌تر از دل مجو که نیست

Ғайри нангу ор , кору бори дил

غیر ننگ و عار، کار و بار دل

Хиҷлатам кашад , пеши чашм аз онк

خجلتم کُشد، پیش چشم از آنک

Буд баҳри ман дар фишори дил

بود بهر من در فشارِ دل

Бас ки ҳар куҷо рафт ва барнагашт

بس که هر کجا رفت و برنگشت

Дида шуд сифед , зи интизори дил

دیده شد سفید، ز انتظار دل

Умр шуд ҳаром , бохатми тамом

عمر شد حرام، باختم تمام

Обрӯу ном , дар қимори дил

آبرو و نام، در قمار دل

Баъд аз ин зарар , аблаҳами магар

بعد از این ضرر، ابلهم مگر

Хам кунам камари зери бори дил ?

خم کنم کمر زیر بار دل؟

Ҳар ду ноксим ,гар дигар расем

هر دو ناکسیم، گر دگر رسیم

Дил ба кори ман , ман ба кори дил

دل به کار من، من به کار دل

Доғдор чун лола аш кунам

داغدار چون لاله اش کنم

То ба кӣ тавон буд хори дил

تا به کی توان بود خار دل

Ҳамчуи рустам аз тир ғам кунам

همچو رستم از تیر غم کُنم

Кӯри чашми Исфандиёри дил

کور چشم اسفندیار دل

Хӯн дил бирехт аз ду чашми ман

خون دل بریخت از دو چشم من

Хуши дилам аз ин , интиҳори дил

خوش‌دلم از این، انتحار دل

Ифтихори мард дар дурустӣ аст

افتخار مرد در درستی است

Ваз шикастагӣаст эътибори дил

وز شکستگی است اعتبار دل

Орифи ин қадари лоф то ба кӣ ?

عارف این قدر لاف تا به کی؟

Шер оҷизаст аз шикори дил

شیر عاجز است از شکار دل

Муқтадиртарин хусравон шуданд

مقتدرترین خسروان شدند

Маҳв дар кафи иқтидори дил

محو در کف اقتدار دل