Дӯши андари базми васл ёр будам то ба рӯз
دوش اندر بزم وصل یار بودم تا به روز
Шаби ҳамаи шаби масти он дидор будам то ба рӯз
شب همه شب مست آن دیدار بودم تا به روز
Берақибу муддаӣ дар гулшани айшу тараб
بیرقیب و مدعی در گلشن عیش و طرب
Ҳам нишин бо он гул бехор будам то ба рӯз
همنشین با آن گل بیخار بودم تا به روز
Гуҳи гуҳӣ дар хоби мастӣ бе худ ва гоҳе дигар
گهگهی در خواب مستی بیخود و گاهی دگر
Дар ҳавоӣ рӯй ӯ бедор будам то ба рӯз
در هوای روی او بیدار بودم تا به روز
Бо хаёли чашми махмураш чу ринд май параст
با خیال چشم مخمورش چو رند میپرست
Як ду дами масту дамӣ ҳушёр будам то ба рӯз
یک دو دم مست و دمی هشیار بودم تا به روز
Дили пай дилбар бирафт ва боз омад дилбарам
دل پی دلبر برفت و باز آمد دلبرم
Давр аз он ма бедил ва дилдор будам то ба рӯз
دور از آن مه بیدل و دلدار بودم تا به روز
Шаби зи фикри зулф ӯ ҷон буд андари печу тоб
شب ز فکر زلف او جان بود اندر پیچ و تاب
Вази рух ӯ ғарқа дар анвор будам то ба рӯз
وز رخ او غرقه در انوار بودم تا به روز
Бе асирии фориғ аз ағёру таъни муддаӣ
بیاسیری فارغ از اغیار و طعن مدعی
Дар тамошои ҷамол ёр будам то ба рӯз
در تماشای جمال یار بودم تا به روز