Хаташи машк аз занхдон май برارد
خطش مشک از زنخدان می برآرد
Маро аз дил на аз ҷон май برارد
مرا از دل نه از جان می برآرد
Хаташи хоно аз он омад ки бе калак
خطش خوانا از آن آمد که بی کلک
Мидод аз лаъли хандон май برارد
مداد از لعل خندان می برآرد
Мидоди онҷо ки бошад лавҳи симинаш
مداد آنجا که باشد لوح سیمینش
зи нуқраи хат чун ҷон май برارد
ز نقره خط چون جان می برآرد
Кадомин хат ? хато рафт ончӣ гуфтам
کدامین خط؟خطا رفت آنچه گفتم
Магари хор аз гулистон май برارد
مگر خار از گلستان می برآرد
Чунин ҷое чаҳ ҷой хор бошад ?
چنین جایی چه جای خار باشد؟
Ки аз гули барги райҳон май برارد
که از گل برگ ریحان می برآرد
Чаҳ мегӯям ки райҳон ходим ӯст
چه میگویم که ریحان خادم اوست
Ки сунбул аз намакдон май برارد
که سنبل از نمکدان می برآرد
Чаҳ ҷои сунбули торик рӯй аст
چه جای سنبل تاریک روی است
Ки сабзаи зоби ҳайвон май برارد
که سبزه زاب حیوان می برآرد
зи сабзаи ҳеҷ ширинӣ наёяд
ز سبزه هیچ شیرینی نیاید
Набот аз шкрстон май برارد
نبات از شکرستان می برآرد
Наботи онҷо чаҳ вазни оради валикин
نبات آنجا چه وزن آرد ولیکن
Зумуррадро зи марҷон май برارد
زمرد را ز مرجان می برآرد
Чаҳ синҷид дар чунин мавқеи зумуррад
چه سنجد در چنین موقع زمرد
Ки машк аз моҳи тобон май برارد
که مشک از ماه تابان می برآرد
Ки донад то ба сарсабзии хат ӯ
که داند تا به سرسبزی خط او
Чаҳ ширинии зи девон май برارد
چه شیرینی ز دیوان می برآرد
Ба як дами кофари зулфаш ба мӯе
به یک دم کافر زلفش به مویی
Дамор аз сад мусулмон май برارد
دمار از صد مسلمان می برآرد
зи санги хораи хӯн , яъне ки ёқӯт
ز سنگ خاره خون، یعنی که یاقوت
Ба захми тири мижгон май برارد
به زخم تیر مژگان می برآرد
Миён шаҳр мегардад чу хуршед
میان شهر میگردد چو خورشید
Хурӯш аз чархи гардон май برارد
خروش از چرخ گردان می برآرد
Дилам аз ишқи рӯйиши зер бар ӯ
دلم از عشق رویش زیر بر او
Нафаси дуздидаи пинҳон май برارد
نفس دزدیده پنهان می برآرد
Чу май тарсади зи чашми бади нафас ро
چو میترسد ز چشم بد نفس را
Ниҳон аз хештан зон май برارد
نهان از خویشتن زان می برآرد
Фарид аз даст ӯ сад қисса ҳар рӯз
فرید از دست او صد قصه هر روز
Ба пеши чашми султон май برارد
به پیش چشم سلطان می برآرد