Субҳ бар шаби шитоб май орад
صبح بر شب شتاب میآرد
Шаби сари андари ниқоб май орад
شب سر اندر نقاب میآرد
Гиряи шамъи вақти хандаи субҳ
گریهٔ شمع وقت خندهٔ صبح
Мастро дар азоб май орад
مست را در عذاب میآرد
Соқиои оби лаъли даҳ ки дилам
ساقیا آب لعل ده که دلم
Соъатии сар ба об май орад
ساعتی سر به آب میآرد
Хезу хӯни Сиёвуши ор ки субҳ
خیز و خون سیاوش آر که صبح
Теғи афросйоб май орад
تیغ افراسیاب میآرد
Хез эй мутриб ва бихон ғазалӣ
خیز ای مطرب و بخوان غزلی
Ҳин ки Зуҳраи рубоб май орад
هین که زهره رباب میآرد
Субҳдам чун самоъ гӯш кунӣ
صبحدم چون سماع گوش کنی
Дидаро сахти хоб май орад
دیده را سخت خواب میآرد
Мутриби мо рубоб ме созад
مطرب ما رباب میسازد
Соқии мо шароб май орад
ساقی ما شراب میآرد
Ҳамаи асбоб айш ҳаст валек
همه اسباب عیش هست ولیک
Марги теғ аз қроб май орад
مرگ تیغ از قراب میآرد
Олимии айш бо аҷал ҳеҷ аст
عالمی عیش با اجل هیچ است
Ин суханро ки тоб май орад
این سخن را که تاب میآرد
эй дариғо кигар диранг кунам
ای دریغا که گر درنگ کنم
Умр бар ман шитоб май орад
عمر بر من شتاب میآرد
Дар ғами марг бе намаки аттор
در غم مرگ بینمک عطار
Аз дили худ кабоб май орад
از دل خود کباب میآرد