Аз сари зулфи дилкашати буи ба мо наме расад

از سر زلف دلکشت بوی به ما نمی‌رسد

Буии куҷо ба мо расад чун ба сабо наме расад

بوی کجا به ما رسد چون به صبا نمی‌رسد

Рӯз ба шаб намерасад то зи хаёли зулфи ту

روز به شب نمی‌رسد تا ز خیال زلف تو

Бар дили ман зи чорсўи хайл бало наме расад

بر دل من ز چارسو خیل بلا نمی‌رسد

Бўки дуои ман шабӣ дар сари зулф ту расад

بوک دعای من شبی در سر زلف تو رسد

Чун ман длшкстаҳро беш дуо наме расад

چون من دلشکسته را بیش دعا نمی‌رسد

намерасад аз ду ҷазаъи ту тири бало ба ҷони ман

می‌رسد از دو جزع تو تیر بلا به جان من

Гарчи савоб нест он ҳеҷ хато наме расад

گرچه صواب نیست آن هیچ خطا نمی‌رسد

Дар аҷабам ки дасти ту чун ба ҳама ҷаҳон расад

در عجبم که دست تو چون به همه جهان رسد

Чист сабаб ки як нафаси сӯй вафо наме расад

چیست سبب که یک نفس سوی وفا نمی‌رسد

Хок тӯйем лоҷарам дар раҳи ишқи ту зи мо

خاک توییم لاجرم در ره عشق تو ز ما

Гирди баромаду зи ту буи ба мо наме расад

گرد برآمد و ز تو بوی به ما نمی‌رسد

Раҳм кун эй маро чу ҷон бар дили онкӣ дар раҳат

رحم کن ای مرا چو جان بر دل آنکه در رهت

наменараҳад зи дарди ту вази ту даво наме расад

می‌نرهد ز درد تو وز تو دوا نمی‌رسد

Гарчи Фарид фард шуд дар талаби висоли ту

گرچه فرید فرد شد در طلب وصال تو

Васли ту кӣ бадв расад чун ба сазо наме расад

وصل تو کی بدو رسد چون به سزا نمی‌رسد

Хониш
ғзл шморҳ 241 — ъндлӣб