На дил чу ғамат омад аз хештани андешад
نه دل چو غمت آمد از خویشتن اندیشد
На ақл чу ишқ омад аз ҷону тани андешад
نه عقل چو عشق آمد از جان و تن اندیشد
Чун оташи ишқи ту шуъла занад андари дил
چون آتش عشق تو شعله زند اندر دل
Кам косттиии он кас каз хештани андешад
کم کاستیی آن کس ، کز خویشتن اندیشد
Гар муддаии ишқат дар чоҳ бало уфтад
گر مدعی عشقت در چاه بلا افتد
Куфраст дарин маънии конҷои расани андешад
کفر است درین معنی کانجا رسن اندیشد
Парвона бар маънӣ кӣ муҳаррам шамъ уфтад
پروانه بر معنی کی محرم شمع افتد
Гар дар ҳамаи умри худ аз сӯхтани андешад
گر در همه عمر خود از سوختن اندیشد
Ошиқ ки ба сад зорӣ дар ишқи ту ҷон бидиҳад
عاشق که به صد زاری در عشق تو جان بدهد
Хасмяш кунад ҷонашгар аз кафани андешад
خصمیش کند جانش گر از کفن اندیشد
Ошиқи ҳамаи расво ба дар анҷумани олам
عاشق همه رسوا به در انجمن عالم
Конҷом нагирад раҳгар зи анҷумани андешад
کانجام نگیرد ره گر ز انجمن اندیشد
Ҷоно чу дилами хстии роҳи суханами бастӣ
جانا چو دلم خستی راه سخنم بستی
Аттор ба сад мастӣ то кӣ сухани андешад
عطار به صد مستی تا کی سخن اندیشد