Аз май ишқи нестӣ ҳар ки хурӯш ме занад

از می عشق نیستی هر که خروش می‌زند

Ишқи ту ақлу ҷонашро хона фуруш ме занад

عشق تو عقل و جانش را خانه فروش می‌زند

Ошиқи ишқ ту шудам аз дилу ҷон ки ишқи ту

عاشق عشق تو شدم از دل و جان که عشق تو

Пардаи наҳуфта май дард захм хамӯш ме занад

پرده نهفته می‌درد زخم خموش می‌زند

Дил чу зи дарди дарди ту маст хароб ме шавад

دل چو ز درد درد تو مست خراب می‌شود

Умр видоъ мекунад ақл хурӯш ме занад

عمر وداع می‌کند عقل خروش می‌زند

Гарчи дили хароби ман аз май ишқ маст шуд

گرچه دل خراب من از می عشق مست شد

Лек сабӯҳи васлро наъра ба ҳуш ме занад

لیک صبوح وصل را نعره به هوش می‌زند

Дил чу ҳариф дард шуд соқӣ ӯст ҷони мо

دل چو حریف درد شد ساقی اوست جان ما

Дил меишқ мехӯрд ҷоми дам нӯш ме занад

دل میِ عشق می‌خورد ، جان دمِ نوش می‌زند

То дили ман ба муфлисӣ аз ҳама кун даргузашт

تا دل من به مفلسی از همه کون درگذشت

Аз ҳама кӣна мекашад бар ҳама дӯш ме занад

از همه کینه می‌کشد بر همه دوش می‌زند

То зи шароби шавқи ту дил бичишед ҷуръа Эй

تا ز شراب شوق تو دل بچشید جرعه‌ای

Ҷумлаи панди зоҳидӣ аз пас гӯш ме занад

جملهٔ پند زاهدان از پس گوش می‌زند

эй дили хастаи нестии марди мақоми ошиқӣ

ای دل خسته نیستی مرد مقام عاشقی

Сайр шудӣ зи худ магари хӯни ту ҷӯш ме занад

سیر شدی ز خود مگر خون تو جوش می‌زند

Ҷони Фарид аз балии маст меаласт шуд

جان فرید از بلی مست می الست شد

Шояд агар ба буи ӯ лоф сурӯш ме занад

شاید اگر به بوی او لاف سروش می‌زند

Хониш
ғзл шморҳ 301 — ъндлӣб