эй кӯии туами мақсад вае рӯй ту мақсӯд

ای کوی توام مقصد و ای روی تو مقصود

Ваии оташи ишқи ту дилами сӯхта чун авд

وی آتش عشق تو دلم سوخته چون عود

Чаҳ бок агарам ақлу дил ва ҷон бинмоанд

چه باک اگرم عقل و دل و جان بنماند

Гӯи ҳеҷ ммон зонка туе зини ҳамаи мақсӯд

گو هیچ ممان زانکه تویی زین همه مقصود

Дар ишқи ту ҷонам ки вуҷӯд ва адамаш нест

در عشق تو جانم که وجود و عدمش نیست

Донеи ту ки чунаст на маъдӯм ва на мавҷӯд

دانی تو که چون است نه معدوم و نه موجود

Ҳар одамӣ ӣиро ки кафии хок сиёҳ аст

هر آدمی‌یی را که کفی خاک سیاه است

Бевосита додӣ ту вуҷӯдии зи сари ҷӯад

بی‌واسطه دادی تو وجودی ز سر جود

Чун жанда қабоеаст ки он хос Аёз аст

چون ژنده قبایی است که آن خاص ایاز است

То чанд кунад саркашӣ аз халъати Маҳмӯд

تا چند کند سرکشی از خلعت محمود

Мардона дар ин роҳи дро эй дили ғофил

مردانه در این راه درآ ای دل غافل

Каз ишқ на мақбул буд мард на мардӯд

کز عشق نه مقبول بود مرد نه مردود

Чун Хизри буруни ои азин сади ниҳодат

چون خضر برون آی ازین سد نهادت

То боз гушойанд туро ин раҳи масдӯд

تا باز گشایند تو را این ره مسدود

Ҳарчиз ки дар ҳар ду ҷаҳони бастаи онӣ

هرچیز که در هر دو جهان بستهٔ آنی

Онаст тўро дар ду ҷаҳони мӯнису маъбуд

آن است تورا در دو جهان مونس و معبود

Аттор агар сояи сифат гум шавад аз худ

عطار اگر سایه‌صفت گم شود از خود

Хуршеди бақои тобдш аз толеъи масъӯд

خورشید بقا تابدش از طالع مسعود

Хониш
ғзл шморҳ 343 — ъндлӣб