Рҳбони дайрро сабаби ошиқӣ чаҳ буд ?

رُهبان دَیْر را سببِ عاشقی چه بود؟

Ков рӯй рози дайр ба халқон наме намӯд

کاو روی راز دیر به خَلقان نمی‌نمود

Аз нестии ду дида ба кас менакард боз

از نیستی دو دیده به کس می‌نکرد باز

Вази ростии равони хилоиқи ҳамеи рабӯд

وز راستی روانِ خلایق همی‌ربود

Чун дар фитод дар мҳни ишқ зон сипас

چون در فتاد در محنِ عشق زان سپس

Дар меҳри дили ибодати исои ҳамеи шунӯд

در مهر دل عبادتِ عیسی همی‌شنود

Дар миллати Масеҳ раво нест ошиқӣ

در ملّتِ مسیح روا نیست عاشقی

ӯ ошиқ аз чаҳ буд ва чаро дар бало фузуд

او عاشق از چه بود و چرا در بلا فزود

Моно ки ёри мо ба хароботи бргзшт

مانا که یارِ ما به خرابات برگذشت

Вази ҳоли дил , ба нағма , сурӯдии ҳамеи сурӯд

وز حالِ دل، به نغمه، سرودی همی‌سرود

намегуфт : « ҳар ки дӯст кунад , дар бало фитад

می‌گفت:«هر که دوست کند، در بلا فتد

Ошиқ зиён кунад ду ҷаҳон аз барои суд »

عاشق زیان کند دو جهان از برای سود‌»

Рҳбони тавофи дайр ҳаме кард ногаҳон

رهبان طواف دیر همی‌کرد ناگهان

Ки овози оннигор хроботёни шунӯд

که‌آوازِ آن نگارِ خراباتیان شنود

Буришад ба боми дайр , чу рухсор ӯ бидид

بَرشد به بام دیر، چو رخسار او بدید

Аз орзӯаш рӯй ба хоки андаруни бсўд

از آرزوش روی به خاک‌ اندرون بسود

Девона шуд зи ишқ ва барошуфт дар замон

دیوانه شد ز عشق و برآشفت در زمان

Занҷири наъти сӯрат ъисиٰ бурид зуд

زنجیرِ نَعتِ صورتِ عیسیٰ بُرید زود

Оташ ба дайри дарзаду бтхонаҳи дршкст

آتش به دیر درزد و بتخانه درشکست

Вази сақфи дайр ӯ ба само бар расед дӯд

وز سقفِ دیرِ او به سما بر رسید دود

Бодаи зи дасти дӯсти дамодам ҳаме кашид

باده ز دستِ دوست دمادم همی‌کشید

Занги балои зи соғару мутриб ҳаме задуд

زنگِ بلا ز ساغر و مطرب همی‌زدود

Сармаст ва беқарор ҳаме гуфт ва мегирист :

سرمست و بی‌قرار همی‌گفت و می‌گریست‌:

« нокардании бкрдм то бӯдании ббўд »

‌«ناکردنی بکردم تا بودنی ببود»

Хониш
ғзл шморҳ 345 — ъндлӣб