эй зулфи ту шабии хуши вонгаҳ ба рӯзи ҳосил
ای زلف تو شبی خوش وانگه به روز حاصل
Хуршедро зи рашкати сад гӯнаи сӯзи ҳосил
خورشید را ز رشکت صد گونه سوز حاصل
Ҳар тобиши маатро Меҳрии ҳазор дар сар
هر تابش مهت را مهری هزار در سر
Ҳар тири таркишатро сад кӣнатуз ҳосил
هر تیر ترکشت را صد کینه توز حاصل
Моҳӣ дар дарҷат ҳар як чу рӯзи равшан
ماهی در درجت هر یک چو روز روشن
Моҳӣ ки дид ӯро сӣ ва ду рӯзи ҳосил
ماهی که دید او را سی و دو روز حاصل
Рӯй ту буд рӯзӣ хатат гирифт нимӣ
روی تو بود روزی خطت گرفت نیمی
Мулкии з хатат омад дар нимрўзи ҳосил
ملکی ز خطت آمد در نیمروز حاصل
Мулкӣ ки ҳеҷ султон ҳосил надид худ ро
ملکی که هیچ سلطان حاصل ندید خود را
Кардӣ ба чашми захмии ту длФрўзи ҳосил
کردی به چشم زخمی تو دلفروز حاصل
Ваон ростӣ ки касро ҳаргиз нашуд мусаллам
وان راستی که کس را هرگز نشد مسلم
Зулф ту карда онро пайвастаи кӯи зи ҳосил
زلف تو کرده آن را پیوسته کو ز حاصل
Парда даридан ту пайванд кӣ пазирад
پرده دریدن تو پیوند کی پذیرد
Атторро гар ояд сад пардаи дузи ҳосил
عطار را گر آید صد پرده دوز حاصل