Ало эй ҷавҳари қудсии куҷое

الا ای جوهر قدسی کجایی

На дар арш ва на дар курсии куҷое

نه در عرش و نه در کرسی کجایی

На дар кунин ва на дар ъолминӣ

نه در کونین و نه در عالمینی

Ки саргардони байни алосбъинӣ

که سرگردان بین الاصبعینی

?герат нақдаст ?данеи дайни тӯдорӣ

گرت نقدست دنیی دین توداری

Яке дилдори бирасемин тӯдорӣ

یکی دلدار برسیمین توداری

Пас он ҷомӣ ки гӯям ин сухани дон

پس آن جامی که گویم این سخن دان

Ту он май бихўдии хештани дон

تو آن می بیخودی خویشتن دان

Чу кори афтодау муҳаррам ту бошӣ

چو کار افتاده و محرم تو باشی

Агар дил гӯямат онҳам ту бошӣ

اگر دل گویمت آنهم تو باشی

Агар ман шеъри созами ҷомаи роз

اگر من شعر سازم جامهٔ راز

Ту марди рози шӯ ҷома биндоз

تو مرد راز شو جامه بینداز

Кунунгар ту чунин кардӣ ки гуфтам

کنون گر تو چنین کردی که گفتم

Фишонам бар ту ҳар дарӣ ки сифтам

فشانم بر تو هر درّی که سفتم

Рафиқии доштами кӯ ҳосилӣ дошт

رفیقی داشتم کو حاصلی داشت

Бҷон дар кори ман баста дилӣ дошт

بجان در کار من بسته دلی داشت

Марои гуфто чу хсрўномаҳи имрӯз

مرا گفتا چو خسرونامه امروز

Фурӯғ хусравӣ дорад длФрўз

فروغ خسروی دارد دلفروز

Агарчӣ қиссае баси длнўозст

اگرچه قصه‌ایی بس دلنوازست

Чгўими қиссаи кӯтаҳ бас дарозаст

چگویم قصه کوته بس درازست

Агар мӯҷаз кунӣ ин достон ро

اگر موجز کنی این داستان را

Намонад ҳеҷ хори он бӯстон ро

نماند هیچ خار آن بوستان را

Чу андари рози қишр ва мағз бошад

چو اندر راز قشر و مغز باشد

Ҳама равған гузинӣ нағз бошад

همه روغن گزینی نغز باشد

Дигар тавҳиду наъту панду амсол

دگر توحید و نعت و پند و امثال

Ки хсрўномаҳро буд аввали ҳол

که خسرونامه را بود اوّل حال

Чу дар асрор нома гуфтае боз

چو در اسرار نامه گفتهیی باز

Ду мавзе кардае як чизи оғоз

دو موضع کردهیی یک چیز آغاز

Агарчӣ аўстодонӣ ки ҳастанд

اگرچه اوستادانی که هستند

Раҳи тавҳиду наъту панди ҷустанд

ره توحید و نعت و پند جستند

Валек андак сухан гуфтанд аз он даст

ولیک اندک سخن گفتند از آن دست

Наоне нест мебайн то чунон ҳаст

نهانی نیست میبین تا چنان هست

Туро додаст ин қӯти худованд

ترا دادست این قوّت خداوند

Ки дар тавҳид ва наътат нест монанд

که در توحید و نعتت نیست مانند

Агар тавҳидӣ ва наътӣ бигӯе

اگر توحیدی و نعتی بگویی

Ҷазои он тробси ин никуӣ

جزای آن ترابس این نکویی

Чу ӯ дар ҳақи ин қисса накӯ гуфт

چو او در حق این قصّه نکو گفت

Чунон кардам ҳамеи алқсаҳ кӯ гуфт

چنان کردم همی القصّه کو گفت

Бурун кардам аз онҷои интихобӣ

برون کردم از آنجا انتخابی

Баровардам зи як як фасли бобӣ

برآوردم ز یک یک فصل بابی

Худоро наът ва тавҳидӣ бигуфтам

خدا را نعت و توحیدی بگفتم

з ҳар дар дар ҳикмат низ сифтам

ز هر در دُرّ حکمت نیز سُفتم

Агрчизии тарозаш розён дошт

اگرچیزی ترازش رازیان داشت

Бгрдонидм аз тарзӣ ки он дошт

بگردانیدم از طرزی که آن داشت

Сухани баъзе ки чун зар номвар шуд

سخن بعضی که چون زر نامور شد

Дар оташи брдмш то об зар шуд

در آتش بُردمش تا آب زر شد

Мусӣбати нома кондўаҳ ҷаҳонаст

مصیبت نامه کاندوه جهانست

Илоҳии нома косрор аёнаст

الهی نامه کاسرار عیانست

Бдорўхонаҳ кардам ҳар ду оғоз

بداروخانه کردم هر دو آغاز

Чгўими зуди рустами зин ва он боз

چگویم زود رستم زین و آن باز

Бдорўхонаҳи панҷсад шахс буданд

بداروخانه پانصد شخص بودند

Ки дар ҳар рӯз набзам менамуданд

که در هر روز نبضم مینمودند

Миёни он ҳама гуфт ва шунидам

میان آن همه گفت و شنیدم

Суханро ба азин навъе надидам

سخن را به ازین نوعی ندیدم

Агар айбӣ буд ,гар айби пӯшӣ

اگر عیبی بود، گر عیب پوشی

Чу таҳсин накунем борӣ хамӯшӣ

چو تحسین نکنیم باری خموشی

Мусӣбати номаи зоди рҳрўонст

مصیبت نامه زاد رهروانست

Илоҳии номаи ганҷи хсрўонст

الهی نامه گنج خسروانست

Ҷаҳони маърифат асрор номааст

جهان معرفت اسرار نامهست

Биҳишти аҳли дил мухтор номааст

بهشت اهل دل مختار نامهست

Мақомоти туюр аммо чунонаст

مقامات طیور امّا چنانست

Ки мурғи ишқро миъроҷ ҷонаст

که مرغ عشق را معراج جانست

Чу хсрўномаҳро тарзӣ аҷибаст

چو خسرونامه را طرزی عجیبست

зи тарз ӯ киу маро насибаст

ز طرز او که و مه را نصیبست

Кунун бишинав сухан то роз гӯям

کنون بشنو سخن تا راز گویم

зи мағзи қисса , маънӣ бозгуем

ز مغز قصّه،‌ معنی بازگویم

Ки дар ҳар нуқтаи сад маънӣ ниҳонаст

که در هر نقطه صد معنی نهانست

Вале дар чашм соҳибдил аёнаст

ولی در چشم صاحبدل عیانست