Шаҳи алқсаҳи зи пеш ӯ бадар шуд
شه القصه ز پیش او بدر شد
Дилии пари ғуссаи наздик падар шуд
دلی پر غصّه نزدیک پدر شد
Басӣ бигирист ва бисёре сухан гуфт
بسی بگریست و بسیاری سخن گفت
Сухан дар фурқати он сарв бен гуфт
سخن در فرقت آن سرو بن گفت
Кигар дастур бахшад шоҳами имрӯз
که گر دستور بخشد شاهم امروز
Хабари пурсам азон моҳи дили афрӯз
خبر پرسم ازان ماه دل افروز
Бсҳро асп тозам роҳ ҷӯям
بصحرا اسپ تازم راه جویم
Бдрё дар нишинам моҳ ҷӯям
بدریا در نشینم ماه جویم
Чу боди субҳ ҳар сӯеи шитобам
چو باد صبح هر سویی شتابم
Магари бӯеи з глрўиӣ биёбам
مگر بویی ز گلرویی بیابم
Чу ҳаст он бути гули сад барги ҷонам
چو هست آن بت گل صد برگ جانم
Агар гул набудам бе барги монам
اگر گل نبودم بی برگ مانم
Шудам чун гул , бхўн афганда бе ӯ
شدم چون گل، بخون افگنده بی او
Бимирамгар бимонами зинда бе ӯ
بمیرم گر بمانم زنده بی او
Падар гуфт ин сухани гуфтор ту нест
پدر گفت این سخن گفتار تو نیست
Касе кӯ ақл дорад ёр ту нест
کسی کو عقل دارد یار تو نیست
Ҳар он оқил ки ин афсона гуяд
هر آن عاقل که این افسانه گوید
Туро дар кори гул девона гуяд
ترا در کار گل دیوانه گوید
Бдрё дар паии гул чун нишинӣ
بدریا در پی گل چون نشینی
Агар бодии шӯии гулро набинӣ
اگر بادی شوی گل را نبینی
Ту пай меҷӯӣ аз об , инат савдо
تو پی میجویی از آب، اینت سودا
Нишони пай ки ёфт аз оби дарё
نشان پی که یافت از آب دریا
Чу хӯрд он моҳро дар оби моҳӣ
چو خورد آن ماه را در آب ماهی
зи моҳии моҳро чун бозхўоҳӣ
ز ماهی ماه را چون بازخواهی
Туро аз моҳ то моҳии тамомат
ترا از ماه تا ماهی تمامت
Ғами он моҳ ва он моҳии ҳаромат
غم آن ماه و آن ماهی حرامت
Биравам ойу з ҳар сӯеи хабари ҷӯй
بروم آی و ز هر سویی خبر جوی
Машав , чун раҳ намайдонӣ сафари ҷӯй
مشو، چون ره نمیدانی سفر جوی
Чу хусрави он сухан башнавад аз шоҳ
چو خسرو آن سخن بشنود از شاه
з бесабрӣ дилаш бархест аз роҳ
ز بی صبری دلش برخاست از راه
Фурӯ борид ашк аз дарди даврӣ
فرو بارید اشک از درد دوری
На дил монадаш на ақли вении сабурӣ
نه دل ماندش نه عقل ونی صبوری
Гирифт аз оби чашмаши пой дар гул
گرفت از آب چشمش پای در گل
Фитодаш оташ сӯзанда дар дил
فتادش آتش سوزنده در دل
Чунон бархест он оташи зи боло
چنان برخاست آن آتش ز بالا
Ки минншсти ҳеҷ аз оби дарё
که میننشست هیچ از آب دریا
Бшаҳи гуфтои зи гул бедил бимонадам
بشه گفتا ز گل بی دل بماندم
Азон беақл ва биҳосл бимонадам
ازان بی عقل و بیحاصل بماندم
Дилам мурғӣаст бе ороми монда
دلم مرغیست بی آرام مانده
Бҳлқи овехта дар доми монда
بحلق آویخته در دام مانده
Кунун аз бас ки дар тан зад пару бол
کنون از بس که در تن زد پر و بال
Қафас бишикаст ва бар парид дар ҳол
قفس بشکست و بر پرّید در حال
Танигар як нафас бар пой дорад
تنی گر یک نفس بر پای دارد
Бсди мардии дамӣ бар ҷой дорад
بصد مردی دمی بر جای دارد
Марои зин тан наёяд подшоҳӣ
مرا زین تن نیاید پادشاهی
Вазин сари шеваи соҳиби кулоҳӣ
وزین سر شیوهٔ صاحب کلاهی
Нахустин сар бибояд афсарӣ ро
نخستین سر بباید افسری را
Вази аввали шоҳ бояд кишварӣ ро
وز اوّل شاه باید کشوری را
Чу ман бе гули сар шоҳӣ надорам
چو من بی گل سر شاهی ندارم
зи шоҳии ҳеҷ огоҳӣ надорам
ز شاهی هیچ آگاهی ندارم
Маро то гул наёяд дар бар ман
مرا تا گل نیاید در بر من
Манеҳ дил бар ман ва бар афсари ман
منه دل بر من و بر افسر من
Дилами гул буд ва гул шуд ғарқаи об
دلم گل بود و گل شد غرقهٔ آب
Касе бедил куҷо ёбад хуру хоб
کسی بی دل کجا یابد خور و خواب
Чу ман ҳастам дили худро тлбгор
چو من هستم دل خود را طلبگار
Чаро бошам маломатро сазовор
چرا باشم ملامت را سزاوار
Надонам гули зи ман гуми гашт ё дил
ندانم گل ز من گم گشت یا دل
Ва ё ҳар ду якеанд , инат мушкил
و یا هر دو یکیاند، اینت مشکل
Чу мл дар шиша гум шуд шиша дар мл
چو مل در شیشه گم شد شیشه در مل
Гулами гӯйии дилами гашту дилами гул
گلم گویی دلم گشت و دلم گل
Маро нест ин замони гул дар бар хеш
مرا نیست این زمان گل در بر خویش
Манам имрӯзи гули ҷӯёии длриш
منم امروز گل جویای دلریش
Агар умрии дувум , дар кӯии хешам
اگر عمری دوم، در کوی خویشم
Ҳаме то ман манам дилҷӯии хешам
همی تا من منم دلجوی خویشم
Чу башнавад он сухани қайсари зи фарзанд
چو بشنود آن سخن قیصر ز فرزند
Фитод аз рӯми афтодаи бдрбнд
فتاد از روم افتاده بدربند
Ба хусрав гуфт сахт афтод бандат
به خسرو گفت سخت افتاد بندت
Наёяд ҳеҷ пандии сӯдмандат
نیاید هیچ پندی سودمندت
Дилам хӯн мешавад аз рафтан ту
دلم خون میشود از رفتن تو
Вале ҳам рӯй нест ошФтни ту
ولی هم روی نیست آشفتن تو
Ман аз ҳиҷрати бхўн дар хуфтаи монда
من از هجرت بخون در خفته مانده
Басӣ ба зонка ту ошуфтаи монда
بسی به زانکه تو آشفته مانده
Чаҳ гӯям қисса чун гуфтанд бисёр
چه گویم قصه چون گفتند بسیار
Ризо додаш брФтни шоҳи ҳушёр
رضا دادش برفتن شاه هشیار
Видоъаш кард ҳолеи шоҳи хусрав
وداعش کرد حالی شاه خسرو
Ҷаҳони афрӯзи шаҳро гашти пас рӯ
جهان افروز شه را گشت پس رو
Басӯи рӯм шуд қайсари ҳам аз роҳ
بسوی روم شد قیصر هم از راه
Бдрё рафт хусрав аз паии моҳ
بدریا رفت خسرو از پی ماه
Ҷаҳони афрӯзу фаррух буду фирӯз
جهان افروز و فرخ بود و فیروز
Дигар даҳ марди устоди дили афрӯз
دگر ده مرد استاد دل افروز
Чу аз маи нимаи моҳӣ басар шуд
چو از مه نیمهٔ ماهی بسر شد
Камони моҳ чун симин сипар шуд
کمان ماه چون سیمین سپر شد
Шуданд он сарварон яксар савора
شدند آن سروران یکسر سواره
БрФтн дар гузаштанд аз ситора
برفتن در گذشتند از ستاره
Шбонрўзии баҳам саҳро буриданд
شبانروزی بهم صحرا بریدند
Чу аз даврии лаб дарё бидиданд
چو از دوری لب دریا بدیدند
Магари фирӯзро шаҳ пеш бинишонад
مگر فیروز را شه پیش بنشاند
Миёни ҷамъ назд хеш бинишонад
میان جمع نزد خویش بنشاند
Заҳр дар пойгоҳаш бештар кард
زهر در پایگاهش بیشتر کرد
Ҳамаи кораши бзр чун оби зркрд
همه کارش بزر چون آب زرکرد
Бадв гуфт аз дуҷониб роҳ дарёст
بدو گفت از دوجانب راه دریاست
Яке сӯии чапу дигари сӯии рост
یکی سوی چپ و دیگر سوی راست
Туро бояд бмшрқ рафт азин роҳ
ترا باید بمشرق رفت ازین راه
Магари онҷои хбрёбӣ азон моҳ
مگر آنجا خبریابی ازان ماه
Ки то ман сӯии мағриби бози гирдам
که تا من سوی مغرب باز گردم
Магари ҳам суҳбати дмсози гирдам
مگر هم صحبت دمساز گردم
Чу башнавад он сухан аз шоҳ , фирӯз
چو بشنود آن سخن از شاه، فیروز
БФирўзӣ бикуштӣ шуд дигар рӯз
بفیروزی بکشتی شد دگر روز
Чу шуд фирӯз аз хусрави ҷудои боз
چو شد فیروز از خسرو جدا باز
зи ғусса , биўФоиӣ кард оғоз
ز غصّه، بیوفایی کرد آغاز
Чу дар табъ касе покӣ набошад
چو در طبع کسی پاکی نباشد
зи Иблисии худ бокӣ набошад
ز ابلیسی خود باکی نباشد
Чу бо худ баради фаррухро шаҳи рӯм
چو با خود برد فرخ را شه روم
Дигар шуд ҳоли фирӯз саг шавам
دگر شد حال فیروز سگ شوم
зи хашми фарруху хусрав чунон шуд
ز خشم فرخ و خسرو چنان شد
Казон кин дар сухан оташ фишон шуд
کزان کین در سخن آتش فشان شد
Ниҳод аз сари қадам дар кӯии дигар
نهاد از سر قدم در کوی دیگر
Кашид онҷои сипар дар рӯй дигар
کشید آنجا سپر در روی دیگر
Бадал мегуфт хусрав дараҷаон кист
بدل میگفت خسرو درجهان کیست
Ки натавон кард бо ӯ як нафас зист
که نتوان کرد با او یک نفس زیست
зи фаррухи хусравам дар ғами фурӯи кишт
ز فرخ خسروم در غم فرو کشت
Басари бории маро дар пой ӯ кишт
بسر باری مرا در پای او کشت
Бчизии камтар аз фаррухи ним ман
بچیزی کمتر از فرخ نیم من
Харидори чунин посухи ним ман
خریدار چنین پاسخ نیم من
Агар фирӯз набӯд олами афрӯз
اگر فیروز نبود عالم افروز
Куҷо фаррух тавонад гашти фирӯз
کجا فرخ تواند گشت فیروز
Агар ҳар як азишон шаҳриёраст
اگر هر یک ازیشان شهریارست
Маро бо он ду бади гавҳар чаҳ кораст
مرا با آن دو بد گوهر چه کارست
Марои он ба ки роҳи шаҳри гирам
مرا آن به که راه شهر گیرم
Вагарна дар ғами ин қаҳр меРом
وگرنه در غم این قهر میرم
Маро бояд бар шопӯр рафтан
مرا باید بر شاپور رفتن
зи дарёи сӯии Найшобӯр рафтан
ز دریا سوی نیشابور رفتن
Бохри зуди киштӣ рорўон кард
بآخر زود کشتی راروان کرد
Кам аз даҳ рӯз ар дарё карон кард
کم از ده روز ار دریا کران کرد
Бнишобўр омад аз раҳи давр
بنیشابور آمد از ره دور
Бхдмт рафт назд шоҳи шопӯр
بخدمت رفت نزد شاه شاپور
Шаҳи шопӯри пеш хеш хондаш
شه شاپور پیش خویش خواندش
Чу дасташ дод бар курсии нишондаш
چو دستش داد بر کرسی نشاندش
Бпрсидши зи фаррухи кӯ куҷо шуд
بپرسیدش ز فرخ کو کجا شد
Чаҳ буд ӯро , чаро аз ту ҷудо шуд
چه بود او را، چرا از تو جدا شد
Барои нақши гул умрӣ дарозаст
برای نقش گل عمری درازست
Ки рафтанд ва ҳануз он нақш бозаст
که رفتند و هنوز آن نقش بازست
Дилами он нақшро дмсоз хондаст
دلم آن نقش را دمساز خواندست
Нкўнқшист алҳақ боз хондаст
نکونقشیست الحق باز خواندست
Кунун бигушоӣ банд ва роз баргӯӣ
کنون بگشای بند و راز برگوی
зи фаррухи зоду нақши гули хабари гӯй
ز فرخ زاد و نقش گل خبر گوی
Забон бикшод фирӯзи сияҳи рӯз
زبان بگشاد فیروز سیه روز
Ки хусрави бод бар ҳар кори фирӯз
که خسرو باد بر هر کار فیروز
Бидон эй шамъи малику тоҷи шоҳон
بدان ای شمع ملک و تاج شاهان
зи тоҷати сарнишини соҳиби кулоҳон
ز تاجت سرنشین صاحب کلاهان
Ки натавон гуфт ҳоли худ чунон зуд
که نتوان گفت حال خود چنان زود
Ки ҳоли мо чунон буд ва чунин буд
که حال ما چنان بود و چنین بود
Чу хусрави шоҳи бастади аҳд аз мо
چو خسرو شاه بستد عهد از ما
Нашуд ғоиби зи ҷаду ҷаҳд аз мо
نشد غایب ز جد و جهد از ما
Чу фаррух дид мардӣу ҷамолаш
چو فرخ دید مردی و جمالش
Шуд аз зӯру зар ӯ дар ҷуволаш
شد از زور و زر او در جوالش
Валикини ман бадал ӯро набудам
ولیکن من بدل او را نبودم
Заруратро нифоқии минмўдм
ضرورت را نفاقی مینمودم
Надидам фурсатӣ акнӯн ки дидам
ندیدم فرصتی اکنون که دیدم
Бхдмти пеши шоҳи худ расидам
بخدمت پیش شاه خود رسیدم
Гурезони гаштам аз хусрави бФрҷом
گریزان گشتم از خسرو بفرجام
Ки пирӯзам чу бигурезам бҳнгом
که پیروزم چو بگریزم بهنگام
Вазони пас ҳарчӣ рафта буд дар роҳ
وزان پس هرچه رفته بود در راه
Саросар ошкоро кард бар шоҳ
سراسر آشکارا کرد بر شاه
Бшаҳи гуфто кунун хусрави бдрёст
بشه گفتا کنون خسرو بدریاست
Нишон меҷӯяд аз глрхи чапу рост
نشان میجوید از گلرخ چپ و راست
Ту мебояд ки ҷӯии он нишони боз
تو میباید که جویی آن نشان باز
Чунин донам ки ёбӣ дар ҷаҳони боз
چنین دانم که یابی در جهان باز
Чу шуд аз корҳо шопӯри огоҳ
چو شد از کارها شاپور آگاه
Равона кард халқиро баҳри роҳ
روانه کرد خلقی را بهر راه
Зиҳии аттор дар баҳри ҳикоят
زهی عطار در بحر حکایت
Тӯдорӣ дар маънӣ бе ниҳоят
توداری درّ معنی بی نهایت
Сухани сари сабзи маънии гашт аз ту
سخن سر سبز معنی گشت از تو
Биҳиштии дори ?данеи гашти азтў
بهشتی دار دنیی گشت ازتو
Чунон кардӣ бмънии достон ро
چنان کردی بمعنی داستان را
Ки борони баҳории бӯстон ро
که باران بهاری بوستان را