Ин сухан нақласт зоскндр ки гуфт
این سخن نقل است زاسکندر که گفت
Ҳарчигирӣ муътадил бояд гирифт
هرچه گیری معتدل باید گرفت
Дар миёни рӯ на бъз ва на базл
در میان رو نه بعز و نه بذل
Зонкаҳи ҷзўисти эътидол аз ақли кул
زآنکه جزویست اعتدال از عقل کل
На бнздики ой ва на мебош давр
نه بنزدیک آی و نه میباش دور
Дар васати рӯ то буд хайри аломўр
در وسط رو تا بود خیر الامور
Чун расан ромътдл афтод тоб
چون رسن رامعتدل افتاد تاب
Гар буд сад ришта гардад як таноб
گر بود صد رشته گردد یک طناب
Вари диҳии тобиши зи андозаи бадар
ور دهی تابش ز اندازه بدر
Бугсалади пайванд ӯ аз икдгр
بگسلد پیوند او از یکدگر
Ту зхшк ватар надорӣ дар ҷаҳон
تو زخشک و تر نداری در جهان
Ҷузи сухани сарду дили гарми ин замон
جز سخن سرد و دل گرم این زمان
Гарчи мардии сарди гўӣии гарми дил
گرچه مردی سرد گوئی گرم دل
Ҷаҳд кун то бӯ ки гардии муътадил
جهد کن تا بو که گردی معتدل
Гар ҳамеи хоҳӣ ки гирад кори нур
گر همی خواهی که گیرد کار نور
Муътадил мебош дар хироломўр
معتدل میباش در خیرالامور
Кор чун беш ояд аз қадари уқул
کار چون بیش آید از قدر عقول
Гар ҳама фазлӣаст пеши оради фузул
گر همه فضلی است پیش آرد فضول
Туъмаи кони покбозонро диҳанд
طعمهٔ کان پاکبازان را دهند
Ҳаргизи он кӣ нўнёзонро диҳанд
هرگز آن کی نونیازان را دهند