Буд маҷнӯнии аҷаб на сар на бен
بود مجنونی عجب نه سر نه بن
Каз ҷунуни густохи мигФтии сухан
کز جنون گستاخ میگفتی سخن
Зоҳидӣ гуфташ ки эй густохи мард
زاهدی گفتش که ای گستاخ مرد
Ин магӯӣу гирди густохии магарад
این مگوی و گرد گستاخی مگرد
Бас хатост ин раҳ ки миҷўӣии мҷўӣ
بس خطاست این ره که میجوئی مجوی
Ҳам раво нест инча мигўӣӣ магӯӣ
هم روا نیست اینچه میگوئی مگوی
Гуфт эзад чун марои девонаи хост
گفت ایزد چون مرا دیوانه خواست
Ҳарчӣ он девона гуяд он равост
هرچه آن دیوانه گوید آن رواست
Гар суханҳои хато бошад маро
گر سخنهای خطا باشد مرا
Чун ним оқил раво бошад маро
چون نیم عاقل روا باشد مرا
Ҳеҷ оқилро набошад ёргӣ
هیچ عاقل را نباشد یارگی
Кӯ бипардозад дилии якборагӣ
کو بپردازد دلی یکبارگی
Бо ҷунун аз баҳр ӯ дар сохтам
با جنون از بهر او در ساختم
Тодлм якборагӣ пардохтам
تادلم یکبارگی پرداختم
Оқилонро шаръ таклиф омадаст
عاقلان را شرع تکلیف آمدست
Бедилонро ишқ ташриф омадаст
بیدلان را عشق تشریف آمدست
Ту бирав эй зоҳид ва кам гӯии ту
تو برو ای زاهد و کم گوی تو
Марди нафасии зари талаби зани ҷӯии ту
مرد نفسی زر طلب زن جوی تو
Бедилонро бо зар ва бо зан чикор
بیدلان را با زر و با زن چکار
Шаръроу ақлро бо ман чикор
شرع را و عقل را با من چکار