Омад саҳар ба пурсиши ман ёр бо рақиб
آمد سحر به پرسش من یار با رقیب
ё ман зиришки ҷони даҳуми имрӯз , ё рақиб
یا من زرشک جان دهم امروز، یا رقیب
Аз хӯни ман ки кушта шудам , пеш аз ӯ гирифт
از خون من که کشته شدم، پیش از او گرفت
зи он пештар ки кушта шавад хўнбҳои рақиб !
ز آن پیشتر که کشته شود خونبها رقیب!
эй биўФо , басаст ҷафо аз худо битарс
ای بیوفا، بس است جفا از خدا بترس
То чанд байнам аз ту ҷафои ман , вафои рақиб !
تا چند بینم از تو جفا من، وفا رقیب!
Зорам бикаш бирав , ки бибинад чу куштаам ;
زارم بکش برو، که ببیند چو کشته ام؛
Ноед зи бими ҷон дигарат аз қафои рақиб !
ناید ز بیم جان دگرت از قفا رقیب!
Чун поймоли рашкам , аз ин базм рафтанам
چون پایمال رشکم، از این بزم رفتنم
Беҳтар ; ббзм то наниҳодааст пои рақиб !
بهتر؛ ببزم تا ننهاده است پا رقیب!
Бегона , боядам зи ту ноошно шудан
بیگانه، بایدم ز تو ناآشنا شدن
Зон пештар ки бо ту шавад ошнои рақиб
زان پیشتر که با تو شود آشنا رقیب
Мардуми зи бадгумонии дил , гирам эй парӣ
مردم ز بدگمانی دل، گیرم ای پری
Ҳам покдомании ту ва , ҳам порсои рақиб !
هم پاکدامنی تو و، هم پارسا رقیب!
Аз кӯии ёри озар агар мерӯй бирав
از کوی یار آذر اگر میروی برو
Огаҳи зи хорӣ ту нагаштааст то рақиб !
آگه ز خواری تو نگشته است تا رقیب!