Дами маргам , зи ғами ҳиҷри ғамӣ беш набошад
دم مرگم، ز غم هجر غمی بیش نباشد
Гар туро байнам ва аз умри дамӣ беш набошад
گر تو را بینم و از عمر دمی بیش نباشد
Ҳаргиз аз ҳасратам огоҳ нагардӣ , магари он дам
هرگز از حسرتم آگاه نگردی، مگر آن دم
Ки зи пои уфтӣу манзили қадамӣ беш набошад
که ز پا افتی و منزل قدمی بیش نباشد
Зада зебои санамони гирди дилами ҳалқау ғофил
زده زیبا صنمان گرد دلم حلقه و غافل
Ки дарин бткдаҳи ҷои санамӣ беш набошад
که درین بتکده جای صنمی بیش نباشد
Онкии одат бастам дода маро , кош надонад
آنکه عادت بستم داده مرا، کاش نداند
Ки зи тарки ситам ӯро ситамӣ беш набошад
که ز ترک ستم او را ستمی بیش نباشد
Тарсам ояд дамӣ аз лутфи табибами басари озар
ترسم آید دمی از لطف طبیبم بسر آذر
Ки марои фурсати гуфтори дамӣ беш набошад
که مرا فرصت گفتار دمی بیش نباشد