Аз сина дил рамеду бзлФи ту ром монад
از سینه دل رمید و بزلف تو رام ماند
Мурғ аз қафас париду гирифтор дом монад
مرغ از قفس پرید و گرفتار دام ماند
намегуфтамаш ғами дил ва , ъмдо накард гӯш ;
می گفتمش غم دل و، عمدا نکرد گوش؛
То ғайр омад ва , суханам нотамом монад !
تا غیر آمد و، سخنم ناتمام ماند!
Аз соқии сипеҳри фиғон , каз ҷафоӣ ӯ
از ساقی سپهر فغان، کز جفای او
Даврӣ басар нарафт ки ҷам рафт ва ҷом монад
دوری بسر نرفت که جم رفت و جام ماند
Моҳии зи тарафи боми баромад ки то саҳар
ماهی ز طرف بام برآمد که تا سحر
Баси чашм чун ситора бар ани тараф бом монад !
بس چشم چون ستاره بر ان طرف بام ماند!
Хусрави зи ҷом рашк надонам чаҳ заҳри рехт
خسرو ز جام رشک ندانم چه زهر ریخت
Фарҳодро бком , ки худ талхком монад ? !
فرهاد را بکام، که خود تلخکام ماند؟!
Афсӯси козр аз ситами ёри биўФо
افسوس کآذر از ستم یار بیوفا
Ҷон дод , лек азу на нишон ва ном намонад
جان داد، لیک ازو نه نشان و نام نماند