Шабӣ ки ғайр дар он остон наме монад

شبی که غیر در آن آستان نمی‌ماند

Марои шикоятӣ аз посбон наме монад

مرا شکایتی از پاسبان نمی‌ماند

зи панҷ рӯзаи тамошои гул , дареғи мадор

ز پنج‌روزه تماشای گل، دریغ مدار

Ки боғи гул , ба ту эй боғбон наме монад

که باغ گل، به تو ای باغبان نمی‌ماند

Ба домат оем ва , донам ки мурғи ҳеҷ чаман

به دامت آیم و، دانم که مرغ هیچ چمن

зи шавқи доми ту , дар ошён наме монад

ز شوق دام تو، در آشیان نمی‌ماند

Фиғон , ки рози муҳаббат ба сина ме хоҳам

فغان، که راز محبت به سینه می‌خواهم

Ниҳон кунам зи ту , аммо ниҳон намемонад !

نهان کنم ز تو، اما نهان نمی‌ماند!

Ба маслиҳат кунам изҳори ранҷиш , ар донам

به مصلحت کنم اظهار رنجش، ار دانم

Ки баъд аз оштӣ ӯ бадгумон наме монад

که بعد از آشتی او بدگمان نمی‌ماند

зи меҳр ӯ зи касонам , ғамӣ , наме дорам

ز مهر او ز کسانم، غمی، نمی‌دارم

Ки моҳи ман ба касе меҳрбон намемонад !

که ماه من به کسی مهربان نمی‌ماند!

Дилат мабод ғамин аз шикоятам , хуш бош ,

دلت مباد غمین از شکایتم، خوش باش،

Бимонад ончӣ ба дил , бар забон намемонад !

بماند آنچه به دل، بر زبان نمی‌ماند!

Фитод кор ба оҳ шабонаам , фардост

فتاد کار به آه شبانه‌ام، فرداست

Ки рӯзи хуш ба ту эй осмон намемонад !

که روز خوش به تو ای آسمان نمی‌ماند!

Расонади муждаи васли ту қосид ва , хаҷал аст

رساند مژدهٔ وصل تو قاصد و، خجل است

Чигуна шод шавам ? кин ба он намемонад !

چگونه شاد شوم؟ کاین به آن نمی‌ماند!

Фиғон ки ашки ман имшаб агар ба рӯзи видоъ

فغان که اشک من امشب اگر به روز وداع

Ба ҷои ғубории азин корвон наме монад

به جا غباری ازین کاروان نمی‌ماند

Хушами зи гиря ба кӯяши зи баҳри ғайри онҷо

خوشم ز گریه به کویش ز بهر غیر آنجا

зи нақши пои ман озар нишон наме монад

ز نقش پای من آذر نشان نمی‌ماند