Дӯшам , ба аҳли базми сар гуфтугӯ набӯд

دوشم، به اهل بزم سر گفتگو نبود

Ман дар хумор будам ва , май дар сабу набӯд

من در خمار بودم و، می در سبو نبود

Пурсед : дар дил ту надонам чаҳ орзӯаст ? !

پرسید: در دل تو ندانم چه آرزوست؟!

Ғофил ки дар дилами биҷузи ин орзӯ набӯд !

غافل که در دلم بجز این آرزو نبود!

Ҷурми саг ту нест , ?герати шаби набарди хоб

جرم سگ تو نیست، گرت شب نبرد خواب

ӯро макаш , ки нола ӣ ман буд , азу набӯд !

او را مکش، که ناله ی من بود، ازو نبود!

Дӯши омадам ки пои ту бӯсам , зи бими ғайр

دوش آمدم که پای تو بوسم، ز بیم غیر

Роҳии бхлўти туам аз ҳеҷ сӯ набӯд

راهی بخلوت توام از هیچ سو نبود

Михўрдм аз фироқи ту хӯни дӯши вақти марг

میخوردم از فراق تو خون دوش وقت مرگ

Яъне ки битўи оби хушам дар гулӯ набӯд

یعنی که بیتو آب خوشم در گلو نبود

Қосид бигӯ : зи давряти озари супурди ҷон

قاصد بگو: ز دوریت آذر سپرد جان

Вар гуяд : аз маниши гила ӣӣ буд , гӯ набӯд !

ور گوید: از منش گله یی بود، گو نبود!