Аз дилами доғи таманнои ту , мушкил баравад ;

از دلم داغ تمنای تو، مشکل برود؛

Мушкили ин доғи пас аз марги ҳам аз дил баравад

مشکل این داغ پس از مرگ هم از دل برود

Вой бар ҳоли шаҳидӣ ки зи қотили бадалаш

وای بر حال شهیدی که ز قاتل بدلش

Ҳасрати захм дигар монда ва қотил баравад

حسرت زخم دگر مانده و قاتل برود

Гарем внолми азин ғам ки дигар нанишинад

گریم ونالم ازین غم که دگر ننشیند

Гирди маҳмили брхм , ноқа чу дар гул баравад !

گرد محمل برخم، ناقه چو در گل برود!

Чашм равшан кунад он гиря ки ҳангоми видоъ

چشم روشن کند آن گریه که هنگام وداع

Карда раҳро гул ва нагузошт ки маҳмил баравад

کرده ره را گل و نگذاشت که محمل برود