Соҳбо ! эй з дидани рӯят
صاحبا! ای ز دیدن رویت
Ёфта чашми аҳли бениши нур
یافته چشم اهل بینش نور
Чанде аз даврии ту бенаӣ
چندی از دوری تو بینایی
Кам шуд аз чашми ман , зи чашми ту давр
کم شد از چشم من، ز چشم تو دور
Хостам аз тугар яке айнак
خواستم از تو گر یکی عینک
На тамаъ буд , буд ин манзур
نه طمع بود، بود این منظور
Коиим то ҳамеша пеши назар
کآییم تا همیشه پیش نظر
Даври уфтами ?герати зи базми ҳузур
دور افتم گرت ز بزم حضور
Кардӣ аз айни мардумии назарӣ
کردی از عین مردمی نظری
Ки нахоҳад шуд аз назари мастур
که نخواهد شد از نظر مستور
Айнакии сӯй ман фиристодӣ
عینکی سوی من فرستادی
Айнакии соф , софтар зи булӯр
عینکی صاف، صافتر ز بلور
Ҳбзои айнакӣ ки нураш кард
حبذا عینکی که نورش کرد
Айнаки меҳру моҳро бинўр
عینک مهر و ماه را بینور
Марҳабои зи он ду чашма ӣ равшан
مرحبا ز آن دو چشمه ی روشن
Ки аз ӯ оби хӯрдаи наргиси ҳур
که از او آب خورده نرگس حور
Ҷо чу додам бидидааш , ҷӯшед
جا چو دادم بدیده اش، جوشید
Чашма ӣ нури азин ду чашма ӣ шӯр
چشمه ی نور ازین دو چشمه ی شور
Баъд аз ин ҳар тараф назора кунам
بعد از این هر طرف نظاره کنم
Икнзри нестии зи чашмами давр
یکنظر نیستی ز چشمم دور
То буд чашми меҳру маи равшан
تا بود چشم مهر و مه روشن
Рӯзи нӯронӣу шаби диҷўр
روز نورانی و شب دیجور
Дӯстатро ду чашми равшани бод
دوستت را دو چشم روشن باد
Душманатро ду дидаи бодои кӯр
دشمنت را دو دیده بادا کور