Ба Гелони куҳани Фҳлӣ аз расатон
به گیلان کهنفحلی از راستان
Фурӯ хонд бар гӯшами ин достон :
فرو خواند بر گوشم این داستان:
Казин пештари котшми гарм буд
کزین پیشتر کآتشم گرم بود
Дилам кин замон сахт шуд , нарм буд
دلم کاین زمان سخت شد، نرم بود
Марои ҳудҳудӣ буд омӯхта
مرا هدهدی بود آموخته
Дариғо аз он ганҷи андӯхта
دریغا از آن گنج اندوخته
Забоновар он тоири меҳрбон
زبانآور آن طایر مهربان
Сулаймону билқисро ҳамзамон
سلیمان و بلقیس را همزمان
Музайян ба тоҷи сулаймони сараш
مزیّن بهتاج سلیمان سرش
Млўн чу дебои алвони париш
ملوّن چو دیبای الوان پرش
Расӯли сулаймон ба шаҳри сабо
رسول سلیمان بهشهر سبا
Шунида зи билқисони марҳабо
شنیده ز بلقیسان مرحبا
Сурӯдии чунон гоҳ бар шохи сарв
سرودی چنان گاه بر شاخ سرو
Ки афгандӣ оташ ба ҷони тзрў
که افگندی آتش بهجان تذرو
Ба гулбуни чунон гоҳ кардӣ фиғон
بهگلبن چنان گاه کردی فغان
Ки булбул гул оварадяш армағон
که بلبل گل آوردیش ارمغان
На тӯтӣу шукр ба минқор дошт
نه طوطی و شکر بهمنقار داشت
зи ҳамсоягии ҳумо ор дошт
ز همسایگی هما عار داشت
Ту гуфтӣ марои тоири рӯҳ буд
تو گفتی مرا طایر روح بود
Ки тан аз ҷудои ши маҷрӯҳ буд
که تن از جداییش مجروح بود
Қазо кард рӯзӣ аз ӯ ғофилам
قضا کرد روزی از او غافلم
Сириштанд гуё зи ғифлати гулам
سرشتند گویا ز غفلت گلم
Азу кард чун ғофилам дар замон
ازو کرد چون غافلم در زمان
Бибин то чаҳ пайдо намӯд осмон ? !
ببین تا چه پیدا نمود آسمان؟!
Магари бозӣ аз дасти шаҳи ҷуста буд
مگر بازی از دست شه جسته بود
Чу шоҳони з ҳар қайди ворастаа буд
چو شاهان ز هر قید وارسته بود
Наёраст дар даст шоҳон нишаст
نیارست در دست شاهان نشست
Ки онҷо набӯд ихтиёраш ба даст
که آنجا نبود اختیارش بهدست
Чу аз соиди шоҳ парвоз кард
چو از ساعد شاه پرواز کرد
зи побанд ва аз дили гиреҳ боз кард
ز پابند و از دل گره باز کرد
Хуш омад зи боми сарои маниш
خوش آمد ز بام سرای منش
Чу ҷғдӣ ки вайрона шуд мأмнш
چو جغدی که ویرانه شد مأمنش
Фгнди он ҳумои соя бар боми ман
فگند آن هما سایه بر بام من
Ба пой худ афтод дар доми ман
بهپای خود افتاد در دام من
зи айвони шоҳяш чун дил гирифт
ز ایوان شاهیش چون دل گرفت
Ба вайрона чун ҷғд манзил гирифт
بهویرانه چون جغد منزل گرفت
Ки чун таблаки шаҳи براردи хурӯш
که چون طبلک شه برآرد خروش
Буд кон хурӯшаш наёяд ба гӯш
بود کان خروشش نیاید بهگوش
Гурусна шуд он бози ширини шикор
گرسنه شد آن باز شیرینشکار
Шудаш коми талх аз ғами рӯзгор
شدش کام تلخ از غم روزگار
На фурсат ки сайдии برارد ба чанг
نه فرصت که صیدی برآرد بهچنگ
На тоқат ки бар ҷўъи оради диранг
نه طاقت که بر جوع آرد درنگ
Фитодаш ба ҳудҳуди нигаҳи ногаҳон
فتادش به هدهد نگه ناگهان
Ту гӯйӣ сияҳ шуд ба чашмаши ҷаҳон
تو گویی سیه شد به چشمش جهان
Назар чун бар он мурғ танноз кард
نظر چون بر آن مرغ طناز کرد
Паии сайдаш аз бом парвоз кард
پی صیدش از بام پرواز کرد
Чу он бенаво дид чангол ӯ
چو آن بینوا دید چنگال او
Мубиноад ё раб касе ҳол ӯ
مبیناد یا رب کسی حال او
Ба ҳудҳуди ҷаҳони боз чун танги сохт
به هدهد جهان باز چون تنگ ساخت
Бибин бози гардун чаҳ найранги сохт ? !
ببین باز گردون چه نیرنگ ساخت؟!
Дар он ҳолати он мурғи зираки зи бим
در آن حالت آن مرغ زیرک ز بیم
Ба минқор шуд ҷангҷӯ бо ғанӣам
به منقار شد جنگجو با غنیم
Чу минқори ҳудҳуди дарози аўФтод
چو منقار هدهد دراز اوفتاد
Ба сӯрохи бинии бози аўФтод
به سوراخ بینی باز اوفتاد
Фурӯ монад аз кори худ ҳар ду боз
فرو ماند از کار خود هر دو باز
Дар андешаи ҷон чаҳ ҳудҳуд , чаҳ боз
در اندیشهٔ جان چه هدهد، چه باز
Чунин монда то ман зи роҳи омадам
چنین مانده تا من ز راه آمدم
Хиромон ба он сайдгоҳи омадам
خرامان به آن صیدگاه آمدم
Аҷаб мондам аз бозии рӯзгор
عجب ماندم از بازی روزگار
Марои баси ҳаме дидани омӯзгор
مرا بس همی دیدن آموزگار
Гирифтам чу сайёд беқайд ро
گرفتم چو صیاد بیقید را
Рҳондм аз он қайди он сайд ро
رهاندم از آن قید آن صید را
Гирифтандаш аз ман ғуломони шоҳ
گرفتندش از من غلامان شاه
Раҳои гашти он мурғак бе гуноҳ
رها گشت آن مرغک بیگناه
Ба бозӣ , магар боз шуд бози асир
به بازی، مگر باز شد باز اسیر
Ба сайд заъифон машав сахтгир
به صید ضعیفان مشو سختگیر