Мҳтро , ҳар чанд шеърам зон ҳар шоир бааст
مهترا ، هر چند شعرم زان هر شاعر بهست
То тавонистам накардам ман зи шеърии иктисоб
تا توانستم نکردم من ز شعری اکتساب
Қасд он дорам ки доман дар чнми зини рӯзи бад
قصد آن دارم که دامن در چنم زین روز بد
Рӯзи хуб хеш ҷӯям бар сутурӣ чун уқоб
روز خوب خویش جویم بر ستوری چون عقاب
То ҳаме хонам китоб ва то ҳаме ҷӯям шароб
تا همی خوانم کتاب و تا همی جویم شراب
Ҳам таваққуъ кардаам дар барги раҳи ҷуфтии рикоб
هم توقع کردهام در برگ ره جفتی رکاب