Шоҳи анӯшервон ба мавсими дай
شاه انوشیروان به موسم دی
Рафт беруни зи шаҳри баҳри шикор
رفت بیرون ز شهر بهر شکار
Дар сар роҳ дид мазраъа Эй
در سر راه دید مزرعهای
Ки дар он буд мардум бисёр
که در آن بود مردم بسیار
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Андари он дашт пермардӣ дид
اندر آن دشت پیرمردی دید
Ки гузаштааст умр ӯ зи навад
که گذشته است عمر او ز نود
Донаи ҷўз дар замин ме кошт
دانهٔ جوز در زمین میکاشت
Ки ба фасли баҳор сабз шавад
که به فصل بهار سبز شود
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Гуфт касрӣ ба пермарди ҳарис
گفت کسری به پیرمرد حریص
Ки чаро ҳирс май зании чандин ?
که چرا حرص میزنی چندین؟
Пойҳои ту бар лаб гӯр аст
پایهای تو بر لب گور است
Ту кунун ҷўз мекунӣ ба замин ?
تو کنون جوز میکنی به زمین؟
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Ҷўзаҳи даҳ сол умр ме хоҳад
جوزه ده سال عمر میخواهد
Ки қавӣ гардад ва ба бор ояд
که قوی گردد و به بار آید
Ту ки баъд аз ду рӯзи хоҳии мард !
تو که بعد از دو روز خواهی مرد!
Грдкони куштанат чаҳ кор ояд ? !
گردکان کِشتنت چه کار آید؟!
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Марди деҳқон ба шоҳ касрӣ гуфт
مرد دهقان به شاه کسری گفت
Мардум аз коштан зиён набаранд
مردم از کاشتن زیان نبرند
Дгарон коштанд ва мо хӯрдем
دگران کاشتند و ما خوردیم
Мо бакорем ва дигарон бихӯранд
ما بکاریم و دیگران بخورند
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Гуфт анӯшервон ба деҳқони зиҳ
گفت انوشیروان به دهقان زه
Зини ҳадиси хушӣ ки кардӣ ёд
زین حدیث خوشی که کردی یاد
Чун чунин гашти шоҳ , ганҷураш
چون چنین گشت شاه، گنجورش
Бадарае зар ба мард деҳқон дод
بدرهای زر به مرد دهقان داد
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Гуфт деҳқони маро кунун сухании сет
گفت دهقان مرا کنون سخنیست
Бӯ ки уфтад писанду мстҳсн
بو که افتد پسند و مستحسن
Ҳеҷ деҳқони зи ҷўзбн дар умр
هیچ دهقان ز جوزبن در عمر
Барначидаст зӯдтар аз ман !
برنچیده است زودتر از من!
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Гуфт касрӣ : зҳозаҳ эй деҳқон
گفت کسری: زهازه ای دهقان
Зини дубораи ҳадиси тоза ватар !
زین دوباره حدیث تازه و تر!
Ҳон ба подоши ин сухани бустон
هان به پاداش این سخن بستان
Аз хазинаи ду бадараи дигар ! . . .
از خزینه دو بدرهٔ دیگر!...
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Кишвар обод мешавад чун шоҳ
کشور آباد میشود چون شاه
Бо раоё кунад ба меҳри сулӯк
با رعایا کند به مهر سلوک
Хона яғмо шавад зи ҷаҳли раис
خانه یغما شود ز جهل رییس
Малик вайрон шавад зи ҷаври мулӯк
ملک ویران شود ز جور ملوک