Ба Константиния битобед моҳ
به قسطنطنیه بتابید ماه
Билразед аз он бурҷҳои сиёҳ
بلرزید از آن برجهای سیاه
зи қарни алзҳби сохт симини каманд
ز قرنالذهب ساخت سیمین کمند
Магар бугзарад зон буруҷи баланд
مگر بگذرد زان بروج بلند
Нигоро нигаҳ кун ки ин нури пок
نگارا نگه کن که این نور پاک
Дигар бора аз ин шаби тобнок
دگر باره از این شب تابناک
Паёмии з ман оварад сӯии ту
پیامی ز من آورد سوی تو
зи равзани даройад ба мшкўии ту
ز روزن درآید به مشکوی تو
зи ғавғои мағриб ба танги омадам
ز غوغای مغرب به تنگ آمدم
Сӯии кишвари достон ҳо шудам
سوی کشور داستانها شدم
з дод ва даҳ ғарби дили бугсалам
ز داد و ده غرب دل بگسلم
Магари лухтӣ ором гирад дилам
مگر لختی آرام گیرد دلم
Тўко гоҳе эй моҳи мшкўии ман
توکا گاهی ای ماه مشکوی من
зи шаби зиндаи дории наҷми пурН
ز شبزندهداری نجم پرن
зи ёди худ эдар маро шод кун
ز یاد خود ایدر مرا شاد کن
Дарин роҳи даврами яке ёд кун
درین راه دورم یکی یاد کن
Ба нимаи раҳи зиндагии роҳи ҷӯй
به نیمه ره زندگی راه جوی
зи чашми ҳасудон бе обрӯӣ
ز چشم حسودان بیآبروی
з Лондон шудам сӯии шаҳри гулон
ز لندن شدم سوی شهر گلان
Ба ҳар гули сароянда бар булбулон
به هر گل سراینده بر بلبلان
Ба марзӣ ки онҷои хуҷастаи сурӯш
به مرزی که آنجا خجسته سروش
Бромш басӣ баркашида хурӯш
برامش بسی برکشیده خروش
Ба хокӣ ки ноҳиди фархундаи чеҳр
به خاکی که ناهید فرخنده چهر
Барафшонад аз захмаи борони меҳр
برافشاند از زخمه باران مهر
Чу зи андешау ранҷи гаштами пареш
چو ز اندیشه و رنج گشتم پریش
Маро хонд Фирдавсӣ аз шаҳри хеш
مرا خواند فردوسی از شهر خویش
Марои пери хайём ба овоз хонд
مرا پیر خیام به آواز خواند
Ҳамми ҳофиз аз шаҳр Широз хонд
همم حافظ از شهر شیراز خواند
Ба ҷое куҷои осмонии сурӯд
به جایی کجا آسمانی سرود
Ба гӯш ояд аз ин сипеҳри кабӯд
به گوش آید از این سپهر کبود
Ба гӯш ниўшндаҳ гирад убӯр
به گوش نیوشنده گیرد عبور
Сабки нағмаи достонҳои давр
سبک نغمهٔ داستانهای دور
Ба ҷое ки гуҳ гоҳат ояд ба гӯш
بهجایی که گه گاهت آید به گوش
Ғўи лашкари Кӯрушу Дориюш
غو لشکر کورش و داریوش
Хамӯшӣ гузидам аз овозашон
خموشی گزیدم از آوازشان
Куҷои нек тар бишинавам розашон
کجا نیکتر بشنوم رازشان
Ба боғии пар аз сӯрӣу ёсуман
به باغی پر از سوری و یاسمن
Дар он нағма хонон шудаи анҷуман
در آن نغمهخوانان شده انجمن
Ба ҳар сугули тоза бо нозу ғанҷ
به هر سوگل تازه با ناز و غنج
Ҳазор андари он ҷовдони нағмаи санҷ
هزار اندر آن جاودان نغمهسنج
Бромши задудаи дил аз кину оз
برامش زدوده دل از کین و آز
Фиканда ғами рӯзгори дароз
فکنده غم روزگار دراز
Шавам то бидонҷо шавам нағмаи санҷ
شوم تا بدانجا شوم نغمهسنج
Магарвораам лухтӣ аз дарду ранҷ
مگر وارهم لختی از درد و رنج
зи порис ва аз шорсони венис
ز پاریس و از شارسان ونیز
зи сарманзили вилўну дӯк низ
ز سرمنزل ویلون و دوک نیز
Гузаштам ба булғор ва он кӯҳсор
گذشتم به بلغار و آن کوهسار
Гирифтам ба Константинияи гузор
گرفتم به قسطنطنیه گذار
Ба шаҳрӣ ки рӯзии зи бахту насиб
به شهری که روزی ز بخت و نصیب
Шуд исломи пирӯзгар бар салиб
شد اسلام پیروزگر بر صلیب
Сипеда чу аз ховарон бугзарад
سپیده چو از خاوران بگذرد
Гиребони шоми сияҳи брдрд
گریبان شام سیه بردرد
Кунад равшани ин тираи чоҳи маро
کند روشن این تیره چاه مرا
Кушояди сӯии шарқи роҳи маро
گشاید سوی شرق راه مرا
Марои орзӯҳо равое кунанд
مرا آرزوها روایی کنند
Ба шаҳномаам раҳнамое кунанд
به شهنامهام رهنمایی کنند
Казин орзӯҳои кӯтоҳи хеш
کزین آرزوهای کوتاه خویش
Ба гӯш оядам бонги дилхоҳи хеш
به گوش آیدم بانگ دلخواه خویش
Ба умеди фардои дилам хуррам аст
به امّید فردا دلم خرم است
Вази андешаи рӯзи дили биғмст
وز اندیشهٔ روز دل بیغمست
Бҳл то як имшаб напечам зи ғам
بهل تا یک امشب نپیچم ز غم
Набошам зи ёди ҳасудони дижам
نباشم ز یاد حسودان دژم
Ки фардои рӯм то ба бонги сурӯд
که فردا روم تا به بانگ سرود
Ниўшми ҳамеи бостонии дуруд
نیوشم همی باستانی درود
Ки хайёму ҳофиз дар он бӯстон
که خیام و حافظ در آن بوستان
Маро чашм доранд чун дӯстон
مرا چشم دارند چون دوستان
Ки бо ҳмрҳонии чунон поки хуй
که با همرهانی چنان پاکخوی
Сӯии гӯри Фирдавсии орем рӯй
سوی گور فردوسی آریم روی
Аз Эрон нарафтааст ному нишон
از ایران نرفته است نام و نشان
Шикаст ҷаҳон нашканад пушташон
شکست جهان نشکند پشتشان
Ҳазимат наёварда дар бандашон
هزیمت نیاورده در بندشان
Набарда дилу фару аўрндшон
نبرده دل و فرّ و اورندشان
Агар чанд парвардгори сухан
اگر چند پروردگار سخن
Бибаст аз сухани диргоҳии даҳан
ببست از سخن دیرگاهی دهن
Чу бартобад астораҳ эй арҷманд
چو برتابد استارهای ارجمند
Ниҳанд аз сухани кохҳои баланд
نهند از سخن کاخهای بلند
Сари тахти ҷамшедро нав кунанд
سر تخت جمشید را نو کنند
зи нави ёди ҷамшеду хсрўкннд
ز نو یاد جمشید و خسروکنند
зи Теҳрон ки бунгоҳ тоҷасту тахт
ز تهران کهبنگاه تاج است و تخت
Ба гӯш ояд овозаи фару бахт
به گوش آید آوازهٔ فر و بخت
зи широзӣу исфаҳонии сурӯд
ز شیرازی و اصفهانی سرود
Будтар забони рукнӣ ва зинда равад
بودتر زبان رکنی و زنده رود
Чу хезади навоашони зи меҳру зи дард
چو خیزد نواشان ز مهر و ز درد
Набошад кам аз фахри нангу набард
نباشد کم از فخر ننگ و نبرد
Ҳануз андари он кишвари дайри боз
هنوز اندر آن کشور دیر باز
Буд абр бо бораи дижи броз
بود ابر با بارهٔ دژ براز
Кунад подшоҳон бо фару зӯр
کند پادشاهان با فرّ و زور
зи пайкор , пирӯзӣу ҷашну сур
ز پیکار، پیروزی و جشن و سور
з ҳар диж ба гӯш ояд овои кӯс
ز هر دژ به گوش آید آوای کوس
з « аиўор » то гоҳи бонги хурӯс
ز «ایوار» تا گاه بانگ خروس
Ту гӯйии ҷаҳон то ҷаҳон лашкараст
تو گویی جهان تا جهان لشکرست
Сӯии фатҳ ҳои гузин раҳбараст
سوی فتحهای گزین رهبرست
Фузун зон футуҳӣ ки дорем ёд
فزون زان فتوحی که داریم یاد
зи кшўргшоён бо фар ва дод
ز کشورگشایان با فر و داد
зи боғии миёни халиҷу хазар
ز باغی میان خلیج و خزر
Каз онҷои гули нави баровардаи сар
کز آنجا گل نو برآورده سر
Савороне аз меҳр ва аз орзӯ
سوارانی از مهر و از آرزو
Расӯлоне аз фикрҳои накӯ
رسولانی از فکرهای نکو
зи Эрони сӯии ғарб пӯянда анд
ز ایران سوی غرب پویندهاند
Шуморо дар он малик ҷӯянда анд
شما را در آن ملک جویندهاند
Сухани гстро мӯӣ бшикофтам
سخن گسترا موی بشکافتم
Каз андешаи ?ут равзанӣ ёфтам
کز اندیشهات روزنی یافتم
« дринки ватар » кати чашмаи зиндагӣ
«درینک وتر» کت چشمهٔ زندگی
Баҷушад злби гоҳи гӯяндагӣ
بجوشد زلب گاه گویندگی
Ҳамеи буи меҳр ояд аз рӯй ту
همی بوی مهر آید از روی تو
Ҳамеи ёд шарм ояд аз хуии ту
همی یاد شرم آید از خوی تو
з дарё гузаштаст андешаи ?ут
ز دریا گذشتست اندیشهات
Буд сифтани гавҳарони пешаи ?ут
بود سفتن گوهران پیشهات
Туро ҳаст андешаи дарёи гузор
ترا هست اندیشه دریا گذار
Азиро чу дрбо буд бе канор
ازیرا چو دربا بود بی کنار
Сурӯди хушати баради ҳуши маро
سرود خوشت برد هوش مرا
Згўҳри бёкндаҳи гӯши маро
زگوهر بیاکنده گوش مرا
Раседӣ ба пои хуҷастаи сурӯш
رسیدی بهپای خجسته سروش
зи Лондон ба манзилгаҳи Дориюш
ز لندن به منزلگه داریوش
Ҷамили зҳоўии бузурги Авестоад
جمیل زهاوی بزرگ اوستاد
Дар ин базми воло забон баргушод
در این بزم والا زبان برگشاد
Ба шеъри андарун трзбонӣ гирифт
به شعر اندرون ترزبانی گرفت
зи шеъраши замин осмонӣ гирифт
ز شعرش زمین آسمانی گرفت
зи анфос ӯ оташии ?бардамӣад
ز انفاس او آتشی بردمید
Ва зон шуъла шуд чун ту нурии падед
و زان شعله شد چون تو نوری پدید
Вазин оташу нур , табъ « баҳор »
وزین آتش و نور، طبع «بهار»
з афсурдагӣ раст ва шуд шуълаи бор
ز افسردگی رست و شد شعلهبار