Саъдё чун ту куҷои нодарра гуфторӣ ҳаст ?
سعدیا چون تو کجا نادرهگفتاری هست؟
ё чу ширини суханати нахл шкрборӣ ҳаст ?
یا چو شیرین سخنت نخلِ شکرباری هست؟
ё чу бустону гулистони ту гулзорӣ ҳаст ?
یا چو بستان و گلستان تو گلزاری هست؟
Ҳеҷам ар нест , таманнои туам борӣ ҳаст
هیچم ار نیست، تمنای توأم باری هست
« машну эй дӯст ки ғайр аз ту маро ёрӣ ҳаст
«مشنو ای دوست که غیر از تو مرا یاری هست
ё шабу рӯз ба ҷузи фикри туам корӣ ҳаст »
یا شب و روز به جز فکر توأم کاری هست»
Лутфи гуфтор ту шуд доми раҳи мурғи ҳавас
لطفِ گفتار تو شد دامِ رهِ مرغِ هوس
Ба ҳавас бол заду гашти гирифтори қафас
به هوس، بال زد و گشت گرفتار قفس
Пои банд ту надорад сари дмсозии кас
پایبندِ تو ندارد سر دمسازیِ کس
Мӯсои ин ҷои бунаади рахт ба умеди қбс
موسِی اینجا بنهد رَخت به امّید قَبَس
« ба каманди сари зулфат на ман афтодаму бас
«به کمند سر زلفت نه من افتادم و بس
Ки ба ҳар ҳалқаи зулфи ту гирифторӣ ҳаст »
که به هر حلقهٔ زلفِ تو گرفتاری هست»
Бе гулистони ту дар даст , ба ҷуз хорӣ нест
بی گلستان تو در دست، به جز خاری نیست
Ба зи гуфтори ту бешоиба , гуфторӣ нест
به ز گفتار تو بیشائبه، گفتاری نیست
Фориғ аз ҷилваи ҳасанат дар ва деворӣ нест
فارغ از جلوهٔ حسنت در و دیواری نیست
эй ки дар дори адаб , ғайри ту диёрӣ нест
ای که در دارِ ادب، غیر تو دَیّاری نیست
« гар бигӯям ки маро бо ту сар ва корӣ нест
«گر بگویم که مرا با تو سر و کاری نیست
Дару девор гувоҳӣ бидиҳад корӣ ҳаст »
در و دیوار گواهی بدهد کاری هست»
Дили зи боғи суханат , вирд каромат бӯед
دل ز باغ سخنت، وَردِ کرامت بوید
Пайрави маслаки ту роҳ саломат пуед
پیرو مسلکِ تو راه سلامت پوید
Давлати номи ту ҳошо ки тамомат ҷӯяд
دولت نام تو حاشا که تمامت جوید
Коби гуфтори ту домон қиёмат шавед
کاب گفتار تو دامان قیامت شوید
« ҳар ки айбам кунад аз ишқ ва маломат гуяд
«هر که عیبم کند از عشق و ملامت گوید
То надидааст туро бар маниш инкорӣ ҳаст »
تا ندیده است تو را بر مَنَش انکاری هست»
Рӯз набӯд ки ба васфи ту сухан сар накунам
روز نَبْوَد که به وصف تو سخن سر نکنم
Шаб набошад ки санои ту мукаррар накунам
شب نباشد که ثنای تو مکرر نکنم
Мункири фазли туро наҳй з мункир накунам
منکِر فضل تو را نهی ز منکَر نکنم
Назд аъмиٰ , сифати меҳр мунаввар накунам
نزد اَعْمیٰ، صفت مِهرِ مُنَوّر نکنم
« сабр бар ҷаври рақибат чаҳ кунам гар накунам
«صبر بر جور رقیبت چه کنم گر نکنم؟
Ҳама донанд ки дар суҳбати гул хорӣ ҳаст »
همه دانند که در صحبتِ گل، خاری هست»
Ҳаркиро ишқ набошад , натавон зиндаи шимурд
هرکه را عشق نباشد، نتوان زنده شمرد
Вонкаҳи ҷонаши зи муҳаббат асарӣ ёфт , намурда
وانکه جانش ز محبت اثری یافت، نَمُرد
Турбати порс чу ҷон , ҷисми ту дар синаи фишурд
تربت پارس چو جان، جسم تو در سینه فشرد
Лек дар хоки ватани оташи ишқати нФсрд
لیک در خاک وطن، آتش عشقت نَفِسُرد
« бод , хокии зи мақом ту биовараду бабрад
«باد، خاکی ز مقام تو بیاورد و بِبُرد
Об ҳар таййиб ки дар табла атторӣ ҳаст »
آب هر طِیب که در طبلهٔ عطاری هست»
Саъдё нест ба кошонаи дили ғайри ту кас
سعدیا نیست به کاشانهٔ دل غیر تو کس
То нафас ҳаст ба ёд ту барорем нафас
تا نفس هست به یاد تو برآریم نفس
Мо ба ҷузи ҳишмату ҷоҳ ту надорем ҳавас
ما به جز حشمت و جاه تو نداریم هوس
эй дами гарми ту оташ зада дар нокасу кас
ای دَمِ گرمِ تو آتش زده در ناکس و کس
« на ман хоми тамаъи ишқи ту май варзаму бас
«نه منِ خامطمع، عشق تو میورزم و بس
Ки чу ман сӯхта дар хайли ту бисёре ҳаст »
که چو من سوخته در خیل تو بسیاری هست»
Коми ҷон , пари шукр аз шеър чу қанди ту буд
کامِ جان، پُر شکر از شعر چو قند تو بُوَد
Байти маъмури адаб , табъи баланди ту буд
بیتَ معمورِ ادب، طبعِ بلند تو بود
Зинда , ҷони башар аз ҳикмату панди ту буд
زنده، جانِ بشر از حکمت و پند تو بود
Саъдё ! гардани ҷонҳо ба каманди ту буд
سعدیا! گردن جانها به کمند تو بود
« ман чаҳ дар пои ту резам ки писанди ту буд
«من چه در پای تو ریزم که پسند تو بود
Сару ҷонро натавон гуфт ки миқдорӣ ҳаст »
سر و جان را نتوان گفت که مقداری هست»
Ростии дафтари саъдӣ ба гулистон монад
راستی دفتر سعدی به گلستان مانَد
Таййиботаш ба гулу лола ва райҳон монад
طیِّباتش به گل و لاله و ریحان مانَد
ӯст пайғамбар ва он нома ба фарқон монад
اوست پیغمبر و آن نامه به فُرقان مانَد
Вонкаҳ ӯро кунад инкор , ба шайтон монад
وانکه او را کند انکار، به شیطان مانَد
« ишқи саъдӣ на ҳадисӣаст ки пинҳон монад
«عشق سعدی نه حدیثی است که پنهان مانَد
« достонӣаст ки бар ҳар сар бозорӣ ҳаст »
«داستانی است که بر هر سر بازاری هست»