Чаҳ балост инки перии зи фано хабар надорад

چه بلاست اینکه پیری ز فنا خبر ندارد

Сари мо нигун шуд аммо таҳи по назар надорад

سر ما نگون شد اما ته پا نظر ندارد

Хати мо ғубор ҳам нест ки ба кас расад паёмаш

خط ما غبار هم نیست‌ که به‌ کس رسد پیامش

Қалами шикастаи ранг , ғами нома бар надорад

قلم شکستهٔ رنگ‌، غم نامه‌بر ندارد

Ду се рӯзи сайди ваҳмам ки ғубори дашти таслим

دو سه روز صید وهمم که غبار دشت تسلیم

Қафас дигар надорад ба ҷузи инки пар надорад

قفس دگر ندارد به جز اینکه پر ندارد

Зхёл пуч ҳастӣ ба адам мабанд тӯҳмат

زخیال پوچ هستی به عدم مبند تهمت

Ки миёни нозуки ёри хабар азкмр надорад

که میان نازک یار خبر ازکمر ندارد

зи ҳубоби як таъаммул ба сад обрӯ кафоф аст

ز حباب یک تأمل به صد آبرو کفاف است

Садафи муҳӣти фурсати гуҳар дигар надорад

صدف محیط فرصت‌گهر دگر ندارد

Ғами интизори соил ба мизоҷи фасл бор аст

غم انتظار سایل به مزاج فصل بار است

Лаби эҳтиёҷи мгшокаҳи Карим дар надорад

لب احتیاج مگشاکه‌کریم در ندارد

Ба ҳаловат қаноат нарасед табъи манъам

به حلاوت قناعت نرسید طبع منعم

Неи бўрбои дарунаши ҳамаи ҷо шукр надорад

نی بوربای درونش همه جا شکر ندارد

зи ғами қиёмати шамъи таҳи хоки ҳам амон нест

ز غم قیامت شمع ته خاک هم امان نیست

Ту ки сӯхтӣ тараб кун шаби мо саҳар надорад

تو که سوختی طرب‌ کن شب ما سحر ندارد

зи аён чаҳ баҳраи барадам ки хаёли ҳам тавон пухт

ز عیان چه بهره بردم‌که خیال هم توان پخت

Сар бе димоғи таҳқиқи сари зер пар надорад

سر بی‌دماغ تحقیق سر زیر پر ندارد

Ки расад ба ҳоли зорам ки шавад ба ғами дучорам

که رسد به حال زارم‌ که شود به غم دچارم

Ки ба кӯии биксиҳои ҳамаи кас гузар надорад

که به‌کوی بیکسیها همه‌کس‌گذر ندارد

Зтлоши ҳиммати шамъи дилами оби гашти бадал

زتلاش همت شمع دلم آب‌گشت بدل

Ки ба завқ рафтан аз хеш ҳама пост сар надорад

که به ذوق رفتن از خویش همه پاست سر ندارد