Гар он хурӯши ҷаҳони яктои сиррӣ ба ин анҷумани برارد

گر آن خروش جهان یکتا سری به این انجمن برآرد

Ҷунунӣ иншо кунад таҳайюр ки олимиро зи ман برارد

جنونی انشا کند تحیر که عالمی را ز من برآرد

Хаёл ҳар чанд пар фишонд зи олами дил бурун наронад

خیال هر چند پر فشاند ز عالم دل برون نراند

Чаҳ мумкинаст ин ки саъии ваҳшат ба ғурбатам аз ватани برارد

چه ممکن است این‌که سعی وحشت به غربتم از وطن برآرد

Нараст тухмӣ дар ин гулистон ки навбаҳорӣ накард сомон

نرست تخمی در این گلستان ‌که نوبهاری نکرد سامان

Ҳавои ранги гулати зи хокам агар براردи чамани برارد

هوای رنگ‌ گلت ز خاکم اگر برآرد چمن برآرد

Надорад аз табъи мо Фсрдн ба ғайри парвози пеши бурдан

ندارد از طبع ما فسردن به غیر پرواز پیش بردن

Ки ранги ошиқ чу пайкари субҳи парӣ ба қадари шикани برارد

که رنگ عاشق چو پیکر صبح پری به قدر شکن برآرد

зи паҳлавии ҷазбаи муҳаббати қавии сети умеди нотавонон

ز پهلوی جذبهٔ محبت قوی‌ست امید ناتوانان

Сазад ки чун ашки далви мо ҳам зи чоҳи ғам бе расани برارد

سزد که چون اشک دلو ما هم ز چاه غم بی‌رسن برآرد

Дили ситамдида умрҳо шуд надорад аз сӯхтани раҳоӣ

دل ستمدیده عمرها شد ندارد از سوختن رهایی

Ба лағзиши ашки коши худро чу шамъ аз ин анҷумани برارد

به لغزش اشک‌کاش خود را چو شمع از این انجمن برآرد

зи хоксор вафо наболад ғубори ҳангомаи тааюн

ز خاکسار وفا نبالد غبار هنگامهٔ تعین

Далели субҳ қиёматаст ин ки марди сар аз кафани برارد

دلیل صبح قیامت است این که مرد سر از کفن برآرد

Ба ин сару барги муғтанами гири тарки андешаи фузулӣ

به این سر و برگ مغتنم گیر ترک اندیشهٔ فضولی

Мабод чун бахяи худнамоеи сарати зи далқи куҳани برارد

مباد چون بخیه خودنمایی سرت ز دلق کهن برآرد

Таҷарруди изтирор рангӣ надорад аз эътибори ҳиммат

تجرد اضطرار رنگی ندارد از اعتبار همّت

Чаҳ ҳайратаст инки ҳизи худро зи ҷиргаи марду зани برارد

چه حیرت است اینکه حیز خود را ز جرگهٔ مرد و زن برآرد

Қадам . Ба оҳанги кин фишурдани з офият нест сарфаи бурдан

قدم‌.به آهنگ‌کین فشردن ز عافیت نیست صرفه بردن

Туфанги қолаби тиҳии намояди дамӣ ки дӯд аз даҳани برارد

تفنگ قالب تهی نماید دمی‌که دود از دهن برآرد

Димоғи аҳли сафои нчинд бисот андоз худситое

دماغ اهل صفا نچیند بساط ‌انداز خودستایی

Саҳар маҳоласт агар нафасро ба дастгоҳи сухани برارد

سحر محال است اگر نفس را به دستگاه سخن برآرد

Ғубори асбоб чанд пӯшади сафои ойӣнаи таҷарруд

غبار اسباب چند پوشد صفای آیینهٔ تجرد

Куҷост урёне ки моро зи хиҷлати перҳани برارد

کجاست عریانیی‌ که ما را ز خجلت پیرهن برآرد

Ба он сафои бихтаҳи сети рангам ки Монии коргоҳи фитрат

به آن صفا بیخته‌ست رنگم‌ که مانی ‌کارگاه فطرت

Қалам ба ойӣна пок созад дамӣ ки тасвири ман برارد

قلم به آیینه پاک سازد دمی که تصویر من برآرد

Нафас ба сад ёс май гудозам дигар з ҳолам мапурс бедил

نفس به صد یاس می‌گدازم دگر ز حالم مپرس بیدل

Чу шамъ раҳмаст бар асирӣ ки маргаш аз сӯхтани برارد

چو شمع رحم است بر اسیری‌که مرگش از سوختن برآرد