Ману ҳасанӣ ки ҳарҷо ёдаш аз дили сари буруни орад
من و حسنیکه هرجا یادش از دل سر برون آرد
Ба дӯши ҳрмжаҳи сад шамъи чашмтар буруни орад
به دوش هرمژه صد شمع چشم تر برون آرد
Камӣнгоҳи ду олами ҳасратами умед он дорам
کمینگاه دو عالم حسرتم امید آن دارم
Ки файзи ҷилваи як ашками нигаҳпарвар буруни орад
که فیض جلوه یک اشکم نگهپرور برون آرد
Згрмиҳои лаълашгар дили дарёи хбргрдд
زگرمیهای لعلش گر دل دریا خبرگردد
Ҳубоби осо ба лаби тбхолаҳи азгўҳри буруни орад
حبابآسا به لب تبخاله ازگوهر برون آرد
Ба саҳрои қиёмати қоматашгар фитнаи ангезад
به صحرای قیامت قامتش گر فتنه انگیزد
Ба ранги гирдбоди оҳ аз дили маҳшари буруни орад
به رنگگردباد آه از دل محشر برون آرد
зи поси нола бар бунёди аҷзи хеш май ларзам
ز پاس ناله بر بنیاد عجز خویش میلرزم
Мабод ин шуъла аз хокистари ман сари буруни орад
مباد این شعله از خاکستر من سر برون آرد
Ки дорад зини дабистони ҳаваси ғайр аз хаёли ман
که دارد زین دبستان هوس غیر از خیال من
Варақи гирдонеи рангӣ ки сад дафтари буруни орад
ورقگردانی رنگیکه صد دفتر برون آرد
Дар ин маҳфили суроғи ъушрат дигар наме ёбам
در این محفل سراغ عشرت دیگر نمییابم
Магар хамёза болад бар худу соғари буруни орад
مگر خمیازه بالد بر خود و ساغر برون آرد
Ба гулшан гар диҳад арзи заъифии нотавон ӯ
بهگلشنگر دهد عرض ضعیفی ناتوان او
Ба нози сад раги гули паҳлавии лоғари буруни орад
به ناز صد رگ گل پهلوی لاغر برون آرد
зи файз обила дорад ҷунунами авҷи иқболӣ
ز فیض آبله دارد جنونم اوج اقبالی
Кигар бар хок раҳ сояд қадами афсари буруни орад
کهگر بر خاک ره ساید قدم افسر برون آرد
зи баҳр бе канории ноумедӣ дар назар дорам
ز بحر بیکناری ناامیدی در نظر دارم
Нами ашкӣ ки ғаввосаши сари азгўҳри буруни орад
نم اشکی که غواصش سر ازگوهر برون آرد
Надомати созкн ҳарҷо кунӣ тамҳиди пайдое
ندامت سازکن هرجا کنی تمهید پیدایی
Ки буии гул ба сад чоки азгрибони сари буруни орад
که بویگل به صد چاک ازگریبان سر برون آرد
Ғами асбоби дунёи чидае бар дил аз ин ғофил
غم اسباب دنیا چیدهای بر دل از این غافل
Ки охири танагии ин хонаи ?ут аз дар буруни орад
که آخر تنگی این خانهات از در برون آرد
Ба тӯфони ҳаводиси чораҳо хӯни шдкнўни сабрӣ
بهتوفانحوادثچارهها خونشدکنونصبری
Ба соҳили киштии моро магари лангари буруни орад
به ساحلکشتی ما را مگر لنگر برون آرد
Сафоҳо охир аз арзи ҳунар зангор шуд бедил
صفاها آخر از عرض هنر زنگار شد بیدل
зи ғифлат то ба кӣ ойӣнаи ?ути ҷавҳари буруни орад
ز غفلت تا بهکی آیینهات جوهر برون آرد