Ҳайҳоти дами бозпасин арзи адаби барад

هیهات دم بازپسین عرض ادب برد

Рашки нафасами сӯхт ки номи ту ба лаби барад

رشک نفسم سوخت‌ که نام تو به لب برد

Бар олами фитрати дил бедард ситам кард

بر عالم فطرت‌ دل بی‌درد ستم کرد

Нашикастан ин шишаи қиёмат ба ҳалаби барад

نشکستن این شیشه قیامت به حلب برد

Фурсат нарасонид ба мақсади нафасам ро

فرصت نرسانید به مقصد نفسم را

Ин шамъи паём саҳарӣ дошт ки шаби барад

این شمع پیام سحری داشت‌ که شب برد

эй ғунчаи ду дами танагии дили муғтанами ингор

ای غنچه دو دم تنگی دل مغتنم انگار

Зини ғамкадаи ҳаргоҳ ?илам рафт тараби барад

زین غمکده هرگاه الم رفت طرب برد

Фарёд ки бе матлабии пеши набардам

فریاد که بی‌ مطلبی پیش نبردم

Ҳиммат хаҷалам кард з ҷое ки талаби барад

همت خجلم‌ کرد ز جایی ‌که طلب برد

Чун шамъ ба бемории дил сохта будам

چون شمع به بیماری دل ساخته بودم

Фурсат ба такаллуф арақӣ кард ки таби барад

فرصت به تکلف عرقی‌ کرد که تب برد

Қосид , нашӯй мунфаили лағзиши мисатон

قاصد، نشوی منفعل لغزش مستان

Хоҳад ҳамаи ҷои номаи мо барги ънби барад

خواهد همه جا نامهٔ ما برگ عنب برد

Дарди талаби ишқ дар офоқ ки дорад

درد طلب عشق در آفاق‌ که دارد

Кам нест ки Лайлии ғами маҷнӯн ба араби барад

کم نیست‌ که لیلی غم مجنون به عرب برد

Гар марг наме буд ғами халқ ки ме хӯрд

گر ‌مرگ نمی‌بود غم خلق‌ که می‌خورد

Сад шукр ки ӣнҷои ҳамаи каси рӯз ба шаби барад

صد شکر که اینجا همه‌کس روز به شب برد

Ин одами вҳўои шараф нисбат ҳастӣ аст

این آدم وحوا شرف نسبت هستی است

Бедил натавон пеши адами номи насаби барад

بیدل نتوان پیش عدم نام نَسَب برد