Кам ва беш ваҳми тааюнати сару барги нақс ва камол шуд

کم و بیش وهم تعینت سر و برگ نقص و کمال شد

Ма нав дамид ва ба бадар зад бгдохти бадар ва ҳилол шуд

مه نو دمید و به بدر زد بگداخت بدر و هلال شد

Ба сафоӣ ҷилва насохтӣ ҳақ кибриё нашинохтӣ

به صفای جلوه نساختی حق‌ کبریا نشناختی

Ба хаёли оинаи бохтӣ ки ҷамол рафт ва мисол шуд

به خیال آینه باختی‌ که جمال رفت و مثال شد

Саҳарии гузаштӣ аз анҷумани сари остин ба ҳавои шикан

سحری‌ گذشتی از انجمن سر آستین به هوا شکن

зи шамеми сояи сунбулати гули шамъи ноф ғизол шуд

ز شمیم سایهٔ سنبلت‌گل شمع ناف غزال شد

Чу нафаси марои зи сари ҳавас ба ҳавои расидаи зи ҷайби дил

چو نفس مرا ز سر هوس به هوا رسیده ز جیب دل

Гиреҳии зи риштаи гушӯдае ки шикасти байза ва бол шуд

گرهی ز رشته ‌گشوده‌ای ‌که شکست بیضه و بال شد

Ба таронаи ман ва мо касе з навой дил чаҳ асари барад

به ترانهٔ من و ما کسی ز نوای دل چه اثر برد

Мазаи ҳаловати ин шкрзозли вадиат лол шуд

مزهٔ حلاوت این شکرزازل ودیعت لال شد

зи талоши нозукии сухан , гуҳари сафо ба замин мазан

ز تلاش نازکی سخن‌،‌ گهر صفا به زمین مزن

Хаҷаласт ҷаври чине ки ба мӯ расед ва суфол шуд

خجل است جور چینیی‌ که به مو رسید و سفال شد

зи ғубори лашкари зиндагии ду се рӯзи пиштрки бро

ز غبار لشکر زندگی دو سه روز پیشترک برآ

Ҳазар аз талоши ду мӯеи ?ут ки ҳуҷуми рустам зол шуд

حذر از تلاش دو مویی‌ات‌ که هجوم رستم زال شد

Ба дил гудохта кун тараб ки дар ин сароби ҷунуни тъб

به دل‌ گداخته ‌کن طرب‌ که در این سراب جنون تعب

Чу ақиқ бар лаби ташнагон , ҷигари оби гашт ва зулол шуд

چو عقیق بر لب‌تشنگان‌، جگر آب‌ گشت و زلال شد

Ситамаст ҷавҳари ғайратат ба фусурдагии фишурди қадам

ستم است جوهر غیرتت به فسردگی فشرد قدم

Бикаш инфеъоли сияҳи дилӣ агар ахгари ту згол шуд

بکش انفعال سیه‌دلی اگر اخگر تو زگال شد

Саҳари ғнокдаҳи ҳаё ба нафас наме баради илтиҷо

سحر غناکدهٔ حیا به نفس نمی‌برد التجا

Чаҳ ғараз ба табъ тўбол зад ки табассуми ту суол шуд

چه غرض به طبع توبال زد که تبسم تو سوال شد

Нафасӣ задӣ ва ҷаҳон гирифт асари таронаи мо ва ман

نفسی زدی و جهان‌ گرفت اثر ترانهٔ ما و من

Ки шикасти шишаи маҳфилат ки садо ба ранг хаёл шуд

که شکست شیشهٔ محفلت ‌که صدا به رنگ خیال شد

зи ҳузури ғайбати комҳо ҳамаи рости заҳмати муддао

ز حضور غیبت‌ کامها همه راست زحمت مدّعا

Ту чаҳ бедил аз ҳама қатъ кун ки вуқуъ рафт ва маҳол шуд

تو چه بیدل از همه قطع‌ کن‌که وقوع رفت و محال شد