Савори барқи умрам , нест баргаштани Аннанам ро

سوار برق عمرم‌، نیست برگشتن عنانم را

Магари номи ту гирам то бигардонад забонам ро

مگر نام تو گیرم تا بگرداند زبانم را

Адами кайфиятами хосияти нақш қадам дорам

عدم کیفیتم خاصیت نقش قدم دارم

Хиромӣ то ба зерипои худ ёбии нишонам ро

خرامی تا به زیرپای خود یابی نشانم را

Ба ранги шамъгар шавқати айёр тоқатам гирад

به رنگ شمع گر شوقت عیار طاقتم گیرد

Кунад парвози ранг аз мағз , холии устихонам ро

کند پرواز رنگ از مغز ، خالی استخوانم را

Ба мурдан низ аз васфи хиромати лаб наме бандам

به مردن نیز از وصف خرامت لب نمی‌بندم

Нагирад сиктаи тарафи доман , ашъори равонам ро

نگیرد سکته طرفِ دامن ، اشعارِ روانَم را

Ғуборӣ май фурушам дар сари бозори мавҳумӣ

غباری می‌فروشم در سر بازار موهومی

Мабодои чашм бастан таҳта гирданд дуконам ро

مبادا چشم بستن تخته گرداند دکانم را

Ба тадбир дигар натавон нишони муддао ҷустан

به تدبیر دگر نتوان نشان مدعا جستن

Шикасти дили магар чун мавҷи зиҳи бандади камонам ро

شکست دل مگر چون موج زه بندد کمانم را

Махоҳ эй муфлисии зиллати каши таслими дўнонм

مخواه ای مفلسی ذلت‌کش تسلیم دونانم

Замин то чанд зери пои нишонди осмонам ро

زمین تا چند زیر پا نشاند آسمانم را

зи шарми офияти маҳрӯмии ҷаҳдам чаҳ май пурсӣ

ز شرم عافیت محرومی جهدم چه می‌پرسی

Арақи беруни ин дарё намехоҳад кронм ро

عرق بیرون این دریا نمی‌خواهد کرانم را

зи дарди дил , дар ин саҳрои нбстми бори умедӣ

ز دردِ دل ، در این صحرا نبستم بارِ امّیدی

Ҷарас нолид ва оташ зад матоъи корвонам ро

جرس نالید و آتش زد متاع کاروانم را

намедонам зи бедоди дили сангини куҷои нолам

نمی‌دانم ز بیداد دل سنگین کجا نالم

Шунидан нест , он дӯшӣ ки бардорад фиғонам ро

شنیدن نیست ، آن دوشی که بردارد فغانم را

Таровушҳои осори карами ҳам мавқеӣ дорад

تراوش‌های آثار کرم هم موقعی دارد

Мабод исроф созад мунфаили рӯзии расонам ро

مباد اسراف سازد منفعل روزی رسانم را

Шабӣ чун шамъи ҳарфӣ аз гудози ишқ сар кардам

شبی چون شمع حرفی از گداز عشق سر کردم

Макидан аз лаб ҳар узв бӯсӣ зад даҳонам ро

مکیدن از لب هر عضو بوسی زد دهانم را

Нафас будам , ҷунуни паймои дашт бе нишони тозӣ

نفَس بودم‌ ، جنون پیمای‌ِ دشتِ بی‌نشان‌تازی

Дил аз ойӣна гардидан гирифт охири Аннанам ро

دل از آیینه گردیدن گرفت آخر عنانم را

зи асрори даҳоне ҳарф чанде кардаам иншо

ز اسرار دهانی حرف چندی کرده‌ام انشا

Ба ҷузи шахси адами бедил ки май фаҳмади забонам ро

به‌جز شخص عدم بیدل که می‌فهمد زبانم را

Хониш
ғзл шморҳ 125 — ъндлӣб