Тамом шавқем лек ғофил ки дил ба роҳ ки май хиромад

تمام شوقیم لیک غافل که دل به راهِ که می‌خرامد

Ҷигар ба доғ ки менишинад нафас ба оҳ ки май хиромад

جگر به داغِ که می‌نشیند نفس به آهِ که می‌خرامد

зи авҷи афлок агар надории ҳузури иқбол бе ниёзӣ

ز اوج افلاک اگر نداری حضور اقبال بی‌نیازی

Нафас ба ҷайбат ғубор дорад бибин сипоҳ ки май хиромад

نفس به جیبت غبار دارد ببین سپاهِ که می‌خرامد

Агар на ранг аз гул ту дорад баҳор мавҳум ҳастӣ мо

اگر نه رنگ از گل تو دارد بهار موهومِ هستی ما

Ба пардаи чоки ин каттонҳо фурӯғи моҳ ки май хиромад

به پردهٔ چاک این کتان‌ها فروغ ماهِ که می‌خرامد

Ғубор ҳар зарра май фурушад ба ҳайрати ойӣна тапидан

غبار هر ذرّه می‌فروشد به حیرت آیینهٔ تپیدن

Роми ғизолони ин биёбони паии нигоҳ ки май хиромад

رم غزالان این بیابان پی نگاهِ که می‌خرامد

зи ранги гул то баҳори сунбул шикаст дорад димоғи нозӣ

ز رنگ گل تا بهار سنبل شکست دارد دماغ نازی

Дар ин гулистон надонам имрӯз , ки каҷи кулоҳ ки май хиромад

در این گلستان ندانم امروز، که کج‌کلاهِ که می‌خرامد

Агар умед фано набошад навид офат задой ҳастӣ

اگر امید فنا نباشد نوید آفت‌زدای هستی

Ба ин сару барги халқи овора дар паноҳ ки май хиромад

به این سر و برگ خلق آواره در پناه‌ِ که می‌خرامد

Нигаҳ ба ҳар ҷо расад чу шабнами зи шарм май бояд оби гаштан

نگه به هر جا رسد چو شبنم ز شرم می‌باید آب گشتن

Агар бидонад ки бемуҳобо ба ҷилваи гоҳ ки май хиромад

اگر بداند که بی‌محابا به جلوه‌گاهِ که می‌خرامد

Ба ҳарза дар пардаи ман ва мо ғурури авҳоми пеши барадӣ

به هرزه در پردهٔ من و ما غرور اوهام پیش بردی

Нагаштӣ огаҳ ки дар димоғати ҳавои ҷоҳ ки май хиромад

نگشتی آگه که در دماغت هوای جاهِ که می‌خرامد

Магари зи чашмаши ғалат нигоҳӣ фитод бар ҳоли зори бедил

مگر ز چشمش غلط نگاهی فتاد بر حال زار بیدل

Вагарнаи он барқ бе ниёзии паии гиёҳ ки май хиромад

وگرنه آن برق بی‌نیازی پی گیاهِ که می‌خرامد