Аз чаҳ даъвии шамъҳо гардан ба боло май кашанд

از چه دعوی شمعها گردن به بالا می‌کشند

Бар ҳаво ҳайфаст чашмӣ каз таҳи по май кашанд

بر هوا حیف است چشمی کز ته پا می‌کشند

Шубҳа натавон кард рафъи азкоргоаҳи умру вазид

شبهه نتوان‌کرد رفع ازکارگاه عمر و وزید

Рӯзгорӣ шуд ки аз мо номи мо вомии кашанд

روزگاری شد که از ما نام ما وامی‌کشند

Маънии мо бе иборати лафзи мо бе имтиёз

معنی ما بی‌عبارت لفظ ما بی‌امتیاز

Буии гули нақшии зи мо пинҳону пайдо май кашанд

بوی ‌گل نقشی ز ما پنهان و پیدا می‌کشند

намепрессатон аз хумори огоҳ бояд зистан

می‌پرستان از خمار آگاه باید زیستن

Интиқоми ъушрати имрӯз , фардо май кашанд

انتقام عشرت امروز ، فردا می‌کشند

Раҳм бар қорун сириштон кун ки аз афсуни ҳирс

رحم بر قارون‌سرشتان کن که از افسون حرص

Ин харони зери замини ҳам бори дунё май кашанд

این خران زیر زمین هم بار دنیا می‌کشند

Чун таъаллуқ рафт дигари завқ озодӣ куҷост

چون تعلق‌رفت دیگر ذوق آزادی‌ کجاست

Хори по бо шухии рафтори якҷо май кашанд

خار پا با شوخی رفتار یکجا می‌کشند

Қонеъони соҳил бе дасти поииҳои аҷз

قانعان ساحل بی‌دست‌پاییهای عجز

Доми моҳигар кашанд аз оби дрбо май кашанд

دام ماهی‌ گر کشند از آب دربا می‌کشند

Бас ки вақфи машраби аҳли қаноати сархушии сет

بس که وقف مشرب اهل قناعت سرخوشی‌ست

Гар ҳама хамёза бошад ҷоми саҳбо май кашанд

گر همه خمیازهٔ باشد جام صهبا می‌کشند

Хоҳад охир бе нафаси гаштан ба урёнӣ кашид

خواهد آخر بی‌نفس‌گشتن به عریانی‌کشید

Муддатӣ шуд ришта аз пероҳани мо май кашанд

مدتی شد رشته از پیراهن ما می‌کشند

Гӯши мисатони ошнои ҳарфу савт ғайр нест

گوش مستان آشنای حرف و صوت غیر نیست

Кӯҳ гар нолад ҳамон қлқли зи мино май кашанд

کوه ‌گر نالد همان قلقل ز مینا می‌کشند

Ташнаи васлам ба он ҳасрат ки наққошони сунъ

تشنهٔ وصلم به آن حسرت‌ که نقاشان صنع

Гар кашанд аз пардаи тасвирами забонҳо май кашанд

گر کشند از پرده تصویرم زبانها می کشند

Мо абаси бедил ба қайди бом ва дар афсурда ем

ما عبث بیدل به قید بام و در افسرده‌ایم

Хонимонҳо низ рахти худ ба саҳро май кашанд

خانمانها نیز رخت خود به صحرا می‌کشند