Ҷроءт перем ин бас ки ба чандини так втоз

جراءت پیریم این بس‌ که به چندین تک وتاز

Қадами аҷзи расонадам ба сари умри дароз

قدم عجز رساندم به سر عمر دراز

Коши биФкри саҳар қатъ шавад фурсати шамъ

کاش بیفکر سحر قطع شود فرصت شمع

Ваҳми анҷоми гудозии сет ба табъи оғоз

وهم انجام‌گدازی‌ست به طبع آغاز

Фурсат аз каф надиҳӣ то нашӯй доғи фусӯс

فرصت ‌از کف‌ ندهی تا نشوی‌ داغ فسوس

Қосиди малики адами нома наме оради боз

قاصد ملک عدم نامه نمی‌آرد باز

Раҳмат аз шухӣ ибром тақозост барӣ

رحمت از شوخی ابرام تقاضاست بری

Он дар боз ки бар рӯй касе нест фароз

آن در باز که بر روی ‌کسی نیست فراز

Нафас кофар нашуд огоҳи зи иқболи суҷуд

نفس‌کافر نشد آگاه ز اقبال سجود

Каллаи ноз хамӣ дошт ба миҳроби намоз

کلهٔ ناز خمی داشت به محراب نماز

Бар ки нолими зи маҳрӯмӣу бибокии табъ

بر که نالیم ز محرومی و بیباکی طبع

Ҳама будем зи тавфиқи адаби муҳаррами роз

همه بودیم ز توفیق ادب محرم راز

Шӯри ағрози ҷаҳон барад хамӯшӣ зи адам

شور اغراض جهان برد خموشی ز عدم

Серума дар кӯҳ намонад аз так ва тоз овоз

سرمه در کوه نماند از تک و تاز آواز

Ҳасану ишқи анҷумани равнақи асрори ҳманд

حسن و عشق انجمن رونق اسرار همند

Бениёзаст , ниёзовар ва бар хеш биноз

بی‌نیاز است‌، نیاز آور و بر خویش بناز

Пеш аз эҷоди зи ташвиши тааюни рстим

پیش از ایجاد ز تشویش تعین رستیم

Дар дил байза шикастем димоғи парвоз

در دل بیضه شکستیم دماغ پرواز

Нашъаи файз рбозт натавон саҳли шимурд

نشئهٔ فیض رباضت نتوان سهل شمرد

эй басои санг ки мино шуд аз иқболи гудоз

ای بسا سنگ که مینا شد از اقبال‌ گداز

Фикри ҷамъияти дили кӯтаҳии ҳиммат буд

فکر جمعیت دل کوتهی همّت بود

Уқда то боз нашуд ришта нигарадед дароз

عقده تا باز نشد رشته نگردید دراز

Нашудам муҳаррами анҷоми ръўнти бедил

نشدم محرم انجام رعونت بیدل

Шамъ ҳарчанд ба ман гуфт : ки гардани мФроз

شمع هرچند به من‌گفت‌:‌که ‌گردن مفراز