Чанд пошии зи ҷунуни хоки ҳаваси брсрхўиш
چند پاشی ز جنون خاک هوس برسرخویش
эй гули ин перҳан ранг барор аз бар хеш
ایگل این پیرهن رنگ برآر از بر خویش
Соз хаст чаманиро ба рахт зиндон кард
ساز خسّت چمنی را به رُخت زندانکرد
Ба ки чун ғунча дигар дил нанаҳй бар зари хеш
بهکه چون غنچه دگر دل ننهی بر زر خویش
Ин кмонхонаҳи ақомткдаҳ улфат нест
این کمانخانه اقامتکدهٔ الفت نیست
Ибратии гири зи кайфияти бом ва дар хеш
عبرتی گیر ز کیفیت بام و در خویش
Нақди мо зарраи сифати дрграҳ бод фаност
نقد ما ذره صفت درگره باد فناست
Ғайри парвоз чаҳ дорем ба мушти пари хеш
غیر پرواز چه داریم به مشت پر خویش
Умрҳо шуд қадам офиятӣ ме шимурем
عمرها شد قدم عافیتی میشمریم
Шамъ ҳар чашм задан мегузарад аз сари хеш
شمع هر چشم زدن میگذرد از سر خویش
Хиҷлати ҳечкасӣ монеъи ҷамъияти мост
خجلت هیچکسی مانع جمعیت ماست
Зарра он нест ки шероза кунад дафтари хеш
ذره آن نیست که شیرازه کند دفتر خویش
Пеш аз ин мунфаил нашав ва намо натавон зист
پیش از این منفعل نشو و نما نتوان زیست
Мӯ чаҳ миқдори биболад ба тани лоғари хеш
مو چه مقدار ببالد به تن لاغر خویش
Синаи чокон ба ҳам омезиш хосӣ доранд
سینهچاکان به هم آمیزش خاصی دارند
Субҳ дар шабнами гул об кунад шукри хеш
صبح در شبنم گل آب کند شکر خویش
Худшиносии сети талофигар парвози дилат
خودشناسیست تلافیگر پرواز دلت
Нест бар оинаҳо миннати равшангари хеш
نیست بر آینهها منت روشنگر خویش
Арзи дониш чиқадр кулуфт дил дошта аст
عرض دانش چقدر کلفت دل داشته است
Мижа дар дидаи шикасти оина аз ҷавҳари хеш
مژه در دیده شکست آینه از جوهر خویش
эй нигаҳи офиятат дар хури машқ хоб аст
ای نگه عافیتت در خور مشق خواب است
Ба фусуни мижаи тағйири мадаи бистари хеш
به فسون مژه تغییر مده بستر خویش
Бе ту ғаввосии дрбои надомати дорбм
بی تو غواصی دربای ندامت داربم
Ғӯта зад шабнами мо лек ба чашми трхўиш
غوطه زد شبنم ما لیک به چشم ترخویش
Машраб яъс надонам чиқадр ҳавсила дошт
مشرب یأس ندانم چقدر حوصله داشت
Пар накардам зи гудози ду ҷаҳони соғари хеш
پر نکردم ز گداز دو جهان ساغر خویش
Коши бедили ?илами биксими вои сӯзад
کاش بیدل الم بیکسیم وا سوزد
То зи хокистари худ дасти нуҳум бар сари хеш
تا ز خاکستر خود دست نهم بر سر خویش