Агар чу ғунча муяссар шавад шикастани хеш

اگر چو غنچه میسر شود شکستن خویش

Тавон шунид садои зи дом ҷустани хеш

توان شنید صدای ز دام جستن خویش

Муқӣми манзили таҳқиқи гаштан осон нест

مقیم منزل تحقیق ‌گشتن آسان نیست

Бидиҳ ғубори ду олам ба бод ҷустани хеш

بده غبار دو عالم به باد جستن خویش

Хамӯш гаштаму сайри баҳор дил кардам

خموش گشتم و سیر بهار دل کردم

Дар биҳишт гушӯдам чу лаби з бастани хеш

در بهشت ‌گشودم چو لب ز بستن خویش

Ба ранги шамъ дар ин анҷумани ҷаҳонӣ ро

به رنگ شمع در این انجمن جهانی را

Ба сар дуанд ҳавои зи пои нишастани хеш

به سر دواند هوای ز پا نشستن خویش

Хаёли дӯст ба ҳар лавҳ нақш натавон баст

خیال دوست به هر لوح نقش نتوان بست

Ба оби ҳайрат ойӣна ҳаст шустани хеш

به ‌آب ‌حیرت ‌آیینه هست ‌شستن ‌خویش

Чаҳ мумкинаст тасаллӣ ба ғайри қатъи нафас

چه ممکن است تسلی به غیر قطع نفس

з нола нест раҳои тор бе гусастани хеш

ز ناله نیست رها تار بی‌ گسستن خویش

зи дӯди танги фазои сапанди ин маҳфил

ز دود تنگ فضای سپند این محفل

Ба дӯши нолаи гирифтаи сети бор ҷустани хеш

به دوش ناله‌ گرفته‌ست بار جستن خویش

Дар ин муҳӣт ки ҷузи гирди аҷз соҳил нест

در این محیط ‌که جز گرد عجز ساحل نیست

Магар чу мавҷ бабандед бршкстни хеш

مگر چو موج ببندید برشکستن خویش

Чу гул на субҳ камӣнему неи баҳори параст

چو گل نه صبح‌ کمینیم و نی‌ بهار پرست

Шукуфтаем зи паҳлавии синаи хстни хеш

شکفته‌ایم ز پهلوی سینه خستن خویش

Каманди сайд ҳавосаст гӯшагирӣ ҳо

کمند صید حواس است گوشه‌گیری ها

Нишастаем чу мазмун ба фикр бастани хеш

نشسته‌ایم چو مضمون به فکر بستن خویش

Шиканҷи дом буд муфти офияти бедил

شکنج دام بود مفت عافیت بیدل

Чу буи гул накунӣ орзӯии растани хеш

چو بوی‌ گل نکنی آرزوی رستن خویش