Шабии муштоқи рангомезӣ тасвири дили гаштам
شبی مشتاق رنگ آمیزی تصویر دل گشتم
Зголи машқи ин фан бар сиёҳӣ зад хаҷали гаштам
زگال مشق این فن بر سیاهی زد خجل گشتم
Ғуборӣ будам аз ошуфтагии навмеди осўдн
غباری بودم از آشفتگی نومید آسودن
Пари афшонӣ арақҳо кард то имрӯзи гули гаштам
پر افشانی عرقها کرد تا امروز گل گشتم
Ситам аз ҳиأти таслими хубон шарм ме дорад
ستم از هیأت تسلیم خوبان شرم میدارد
Дами теғи қазои баргашт то хӯни бҳли гаштам
دم تیغ قضا برگشت تا خون بحل گشتم
Ваболи мӯии перӣ дар нагирад ҳеҷ кофар ро
وبال موی پیری در نگیرد هیچ کافر را
Шабами ин бскаҳ бо субҳи қиёмати муттасили гаштам
شبم این بسکه با صبح قیامت متصلگشتم
Ҳаёи забти Аннани оташи ёқӯт ман дорад
حیا ضبط عنان آتش یاقوت من دارد
Шарарҳо об шуд то ӣнқадарҳо муштаали гаштам
شررها آب شد تا اینقدرها مشتعل گشتم
зи диққат танг кардам фитрати арбоби дониш ро
ز دقت تنگ کردم فطرت ارباب دانش را
Чу мӯ дар дидаҳо аз маънии нозуки мухилли гаштам
چو مو در دیدهها از معنی نازک مخل گشتم
Қаноат ҳар чаҳ бошад заҳмат дилҳо наме хоҳад
قناعت هر چه باشد زحمت دلها نمیخواهد
Дар матлаб задам бар табъи халқии диқу сили гаштам
در مطلب زدم بر طبع خلقی دق و سلگشتم
Ба дили чандон ки меҷӯям суроғ худ наме ёбам
به دل چندان که میجویم سراغ خود نمییابم
намедонам чаҳ будам дар хаёлаши музмаҳили гаштам
نمیدانم چه بودم در خیالش مضمحلگشتم
Саҳар ҳар сӯи хиромади шабнами эҷод арақ дорам
سحر هر سو خرامد شبنم ایجاد عرق دارم
Нафас парвоз додам коинқдрҳои мунфаили гаштам
نفس پرواز دادم کاینقدرها منفعل گشتم
Баҳори рангам аз осӯдагӣ тарафӣ набаст охир
بهار رنگم از آسودگی طرفی نبست آخر
Чаҳ созами ошнои фурсати паймони гусали гаштам
چه سازم آشنای فرصت پیمان گسل گشتم
Талоши шавқ аз маҳрӯмии ман доғ шуд бедил
تلاش شوق از محرومی من داغ شد بیدل
Ки баргарди ҷаҳонӣ чун нафаси беруни дили гаштам
که برگرد جهانی چون نفس بیرون دل گشتم