Дилбар шуд ва ман по ба дили сахти фишурдам
دلبر شد و من پا به دلِ سخت فشردم
Хокам ба сар эй вой ки ҷон рафт ва намардум
خاکم به سر ایوای که جان رفت و نمردم
Ҷони сахтии сабрам чиқадр ланг баровард
جانسختی صبرم چقدر لنگ برآورد
Кин як мижаи раҳи ҷуз ба қиёмати нспрдм
کاین یک مژهرَه جز به قیامت نسپردم
Поем таҳ санг омад аз аФсрдси дил
پایم ته سنگ آمد از افسردس دل
Тоби раги хоб аз гиреҳ обила хӯрдам
تاب رگ خواب از گره آبله خوردم
Барги тараби ман варақи лолаи баромад
برگ طرب من ورق لاله برآمد
Оҳ аз кафи хӯнӣ ки сияҳи гашту Фсрдм
آه از کف خونی که سیه گشت و فسردم
Дил низ зи афсурдагӣами серума наво монад
دل نیز ز افسردگیم سرمهنوا ماند
Бар шиша асар кард сияҳи рӯзии дардам
بر شیشه اثر کرد سیهروزی دردم
Чун шамъи қиёмат ба серум мекунад имрӯз
چون شمع قیامت به سرم میکند امروز
Доғӣ ки чаро сар ба хиромаши нспрдм
داغی که چرا سر به خرامش نسپردم
эй ҳастӣ мубрам чаҳ надомати ҳавасӣ ҳост
ای هستی مبرم چه ندامتهوسیهاست
Гирами ду се рӯзати нафасӣ буд шимурдам
گیرم دو سه روزت نفسی بود شمردم
Бе шарбати марги ӣнқадарами доғ тапидан
بی شربت مرگ اینقدرم داغ تپیدن
Фарёди зи обӣ ки надоданд ба хӯрдам
فریاد ز آبی که ندادند به خوردم
Бедили мижа аз хеши нбстм , гунаҳ кист ?
بیدل مژه از خویش نبستم، گنهِ کیست؟
Роҳат амалӣ дошт ки ман пеши набардам
راحت عملی داشت که من پیش نبردم