Ҳунарҳо арза додам бо сафои дил ҳасад кардам
هنرها عرضه دادم با صفای دل حسد کردم
зи ҷӯши ҷавҳари ин ойӣнаро охир намад кардам
ز جوش جوهر این آیینه را آخر نمد کردم
Амл дар олами бихўост бар ҳам зад ҳақиқат ро
امل در عالم بیخواست بر هم زد حقیقت را
зи ъқбои музди некии хостами ғофил ки бад кардам
ز عقبا مزد نیکی خواستم غافل که بد کردم
Раҳ мақсад намегардид тай бесаъй баргаштан
ره مقصد نمیگردید طی بی سعی برگشتن
зи гирди ҳиммати рӯ бар қафои тозӣ балад кардам
ز گرد همت رو بر قفا تازی بلد کردم
Ба иқболи дил аз сад баҳри гавҳар боҷ ме гирад
به اقبال دل از صد بحر گوهر باج میگیرد
Сиришкиро ки чун мижгони ниёзи даст рад кардам
سرشکی را که چون مژگان نیاز دست رد کردم
Дарин гулшани зи хешами баради ногуҳи завқи эсорӣ
درین گلشن ز خویشم برد ناگه ذوق ایثاری
Чу субҳ аз як шикасти ранг бар сад гул мадад кардам
چو صبح از یک شکست رنگ بر صد گل مدد کردم
Фзўлиҳоӣ ҳастӣ ё раб аз васфам чаҳ ме хоҳад
فضولیهای هستی یا رب از وصفم چه میخواهد
Бақадр нестии корӣ ки аз ман месазад кардам
بقدر نیستی کاری که از من میسزد کردم
Бғир аз ҳеҷ натавон ваҳми дигар бар адам бастан
بغیر از هیچ نتوان وهم دیگر بر عدم بستن
Ситам кардам ки ман андешаи ҷон ва ҷасад кардам
ستمکردمکه من اندیشهٔ جان و جسد کردم
Ду олам аз дили бимтлби ман фол таскин зад
دو عالم از دل بیمطلب من فال تسکین زد
Муҳӣтиро ба афсуни гуҳар беҷзру мдкрдм
محیطی را به افسونگهر بی جزر و مدّکردم
Ғарази ҷамъияти дил буд агар дунё вагар ъқбо
غرض جمعیت دل بود اگر دنیا وگر عقبا
зи асбоби ончии роҳат нохўшш фаҳмид рад кардам
ز اسباب آنچه راحت ناخوشش فهمید رد کردم
Дар оғоз интиҳо дидам саҳарро шом фаҳмидам
در آغاز انتها دیدم سحر را شام فهمیدم
Азал то парда бардорад тамошоӣ абад кардам
ازل تا پرده بردارد تماشای ابد کردم
Ҳазор ойӣна гул кард аз кушоди чашми ман бедил
هزار آیینه گل کرد از گشاد چشم من بیدل
Ба ин сифри таҳайюри воҳидиро беадад кардам
به این صفر تحیر واحدی را بیعدد کردم