Чаҳ давлатаст ки ман науммат аз адаби гирам
چه دولت است که من نامت از ادب گیرم
зи шарми дасти тиҳии доманӣ ба лаби гирам
ز شرم دست تهی دامنی به لبگیرم
Ба ишқ агар ҳамаи тан ғӯта ам диҳанд ба қӣр
به عشق اگر همه تن غوطهام دهند به قیر
Чўдоғи лолаи саҳарҳо ба тўФи шбгирм
چوداغ لاله سحرها به طوف شبگیرم
Ба ин забон ки чу шамъами димоғ май сӯзад
به این زبان که چو شمعم دماغ میسوزد
Хамӯш а агар нашавам анҷуман ба таби гирам
خموشا اگر نشوم انجمن به تبگیرم
Хумор агар нашавад нанги маҷлиси ороӣ
خمار اگر نشود ننگ مجلس آرایی
Ба мастии ҳалаби шишагар ҳалаби гирам
به مستی حلب شیشهگر حلبگیرم
Ғами виросат одам нахурдаам чандон
غم وراثت آدم نخوردهام چندان
Ки роҳи хулд ба умеди ин насаби гирам
که راه خلد به امید این نسب گیرم
Надорам ин ҳамаи рағбат ба лиззати дунё
ندارم این همه رغبت به لذت دنیا
Ки нанги отшк аз буии ин ҷалби гирам
که ننگ آتشک از بوی این جلب گیرم
Чу мӯии чинӣ аз иқболи ман чаҳ май пурсӣ
چو موی چینی از اقبال من چه میپرسی
Аннан ба шоми шикастаи сети саъии шбгирм
عنان به شام شکستهست سعی شبگیرم
Хушаст чашм бапушам зи нақши кори ҷаҳон
خوشست چشم بپوشم ز نقشکار جهان
Ҳазор нусха ба ин нуқтаи мунтахаби гирам
هزار نسخه به این نقطه منتخبگیرم
зи тарафи машраби мисатон хаҷал шавам бедил
ز طرف مشرب مستان خجل شوم بیدل
Дамӣ ки ҳафт фалаки баррагӣ аз ънби гирам
دمیکه هفت فلک برگی از عنبگیرم