Мумсик агар ба арз сахо ҷӯшад аз шароб

ممسک اگر به عرض سخا جوشد از شراب

Дастӣ баланд мекунад аммо ба зери об

دستی بلند می‌کند اما به زیر آب

Табъи карами фусурдаи даст тиҳӣ мабод

طبع‌ِ کرم فسردهٔ دست تهی مباد

Баргашти олимии сети ситами хушкии саҳоб

برگشت عالمی‌ست ستم خشکی سحاب

Инаст агар симоҷати арбоби эҳтиёҷ

این است اگر سماجت ارباب احتیاج

Раҳмаст бар мизоҷи дуоҳои мустаҷоб

رحم است بر مزاج دعاهای مستجاب

Ғорати насиби ҳасрати дард муҳаббат ам

غارت‌نصیبِ حسرتِ دردِ محبت‌ام

Нагирист бедилӣ ки зи чашмами набарди об

نگریست بیدلی‌ که ز چشمم نبرد آب

Дил он қадр гирист ки ғами ҳам ба сайл рафт

دل آنقدر گریست‌ که غم هم به سیل رفت

Оташ дар об ғӯта зад аз ашки ин кабоб

آتش در آب غوطه زد از اشک این‌ کباب

Афсонасозӣ шарару барқ то ба кӣ

افسانه‌سازی شرر و برق تا به‌ کی

Гар марди ин раҳеи ту ҳам аз худ буруни шитоб

گر مرد این رهی تو هم از خود برون شتاب

Ёрони абас ба ваҳми таъаллуқ фусурда анд

یاران عبث به وهم تعلق فسرده‌اند

ӣнҷост чун нигаҳи қадам аз хона дар рикоб

اینجاست چون نگه قدم از خانه در رکاب

Субҳ аз нафаси ду мисра барҷаста хонд ва рафт

صبح از نفس‌ دو مصرع‌ِ برجسته خواند و رفت

Девони эътибор ва ҳамин байташ интихоб

دیوان اعتبار و همین بیت‌اش انتخاب

Хоҳии нафас хаёл куну хоҳи гирди ваҳм

خواهی نفس خیال‌ کن و خواه‌ گرد وهم

Чизе намӯдаем дар ойӣнаи ҳубоб

چیزی نموده‌ایم در آیینهٔ حباب

Маҳвему боисии зи таҳайюр падед нест

محویم و باعثی ز تحیر پدید نیست

эй фитрати оби гирду зи мо рафъ кун ҳиҷоб

ای فطرت آب‌ گرد و ز ما رفع‌ کن حجاب

Маънӣ чаҳ вонмоид аз ин лафзҳои пуч

معنی چه وانماید از این لفظ‌های پوچ

Пурташнааст ҷилвау ойӣнаҳо сароб

پرتشنه است جلوه و آیینه‌ها سراب

Дар базми ишқ , илм чаҳу маърифати кадом

در بزم عشق‌، علم چه و معرفت‌ کدام

То ақл гуфтаем ҷунун май дарди ниқоб

تا عقل گفته‌ایم جنون می‌درد نقاب

Дар олимӣ ки ёди ту бо мо муқобил аст

در عالمی‌ که یاد تو با ما مقابل است

Ойӣна мекашад ба рухи сояи офтоб

آیینه می‌کشد به رخِ سایه آفتاب

Бедили зи ҷӯши сабза дар ин раҳ фитода аст

بیدل ز جوش سبزه در این ره فتاده است

Бе чашми як ҷаҳони мижаи тӯҳмати парасти хоб

بی‌چشم یک جهان مژه تهمت‌پرست خواب