Ду рӯзӣ фурсат омӯзад дуруди мстФои мо ро

دو روزی فرصت آموزد درود مصطفا ما را

Ки пеш аз марг дар дунё биёмурзад худои мо ро

که پیش از مرگ در دنیا بیامرزد خدا ما را

Дар ин саҳрои куҷо бо хеш уфтад иттифоқи мо

در این صحرا کجا با خویش افتد اتفاق ما

Ки ваҳм бесару поеи барад аз худ ҷудои мо ро

که وهم بی‌سر و پایی برد از خود جدا ما را

Ба гардиш хона чархем ҳайрони дона чанде

به گردش‌خانهٔ چرخیم حیران دانهٔ چندی

Ғубори мо магари беруни баради зини Асияи мо ро

غبار ما مگر بیرون برد زین‌ آسیا ما را

Агар имрӯзи дил бо хокро ҳ Муртазо ҷӯшад

اگر امروز دل با خاک را‌ه مرتضی جوشد

Кунад маҳшури фардои фазли ҳақ бо асФёи мо ро

کند محشور فردا فضل حق با اصفیا ما را

Ба ҳарфу савт мумкин нест аз олами бурун ҷустан

به حرف و صوت ممکن نیست از عالم برون جستن

Чаҳ созад кас , зи гунбади барнамеи оради садои мо ро

چه سازد کس‌، ز گنبد برنمی‌آرد صدا ما را

зи саъии дасту пои ойӣна мақсад нашуд равшан

ز سعی دست و پا آیینهٔ مقصد نشد روشن

Куҷое эй зи худ рафтан ту чизеи вонмои мо ро

کجایی ای ز خود رفتن تو چیزی وانما ما را

Ғубори мо ба саҳрои адами бол дигар ме зад

غبار ما به صحرای عدم بال دگر می‌زد

Фузулӣ дар куҷои андохт ёрб аз куҷои мо ро

فضولی در کجا انداخت یا رب از کجا ما را

Кабоб хон ҷинати лиззати хӯн ҷигар дорад

کباب خوان جنت لذت خون جگر دارد

Қазо чанде ба завқи ин ғизо дод иштиҳои мо ро

قضا چندی به ذوق این غذا داد اشتها ما را

Кафи хоки нафаси бол ва парем , аззбт мо бигузар

کف خاک نفس بال و پریم‌، از ضبط ما بگذر

Ба гардун май барад чун субҳ аз худ ин ҳавои мо ро

به گردون می‌برد چون صبح‌ از خود این هوا ما را

Ҷунун ҳо доштем аммо ҳиҷоби фақр пеш омад

جنون‌ها داشتیم اما حجاب فقر پیش آمد

зи забт нола кард огоҳи не дар бўрбои мо ро

ز ضبط ناله‌ کرد آگاه نی در بوربا ما را

Нафаси вории магар дар дил хазад умеди осўдн

نفس‌واری مگر در دل خزد امید آسودن

Ки зери осмон пайдо нашуд ҷои ҳеҷ ҷои мо ро

که زیر آسمان پیدا نشد جا هیچ‌جا ما را

Дили афсурда аз мо ғайр бекорӣ наме хоҳад

دل افسرده از ما غیر بیکاری نمی‌خواهد

Ҳино бастааст ин як қатраи хӯни сар то ба пои мо ро

حنا بسته‌است این یک قطره خون سر تا به پا ما را

зи дили умеди улфат буд бо ҳар ноумедӣ ҳо

ز دل امید الفت بود با هر ناامیدی‌ها

Ба ин бегонаи ҳам гоҳе накарданд ошнои мо ро

به این بیگانه هم‌ گاهی نکردند آشنا ما را

Ба урёнӣ касе огаҳ набӯд аз ҳоли мо бедил

به عریانی‌ کسی آگه نبود از حال ما بیدل

Чаҳ расвоӣ ки омад пеш дар зери қабои мо ро

چه‌ رسوایی‌ که آمد پیش در زیر قبا ما را

Хониш
ғзл шморҳ 43 — ъндлӣб