Бандагӣ бо маърифати хоси ҳузури одамии сет

بندگی با معرفت، خاصِ حضورِ آدمی‌ست

Варна аинҷосҷдаҳҳо чун соя яксар мубҳамии сет

ورنه اینجا سجده‌ها چون سایه یکسر مبهمی‌ست

Бо суҷудат аз азал пешонӣамро тавъамии сет

با سجودت از ازل پیشانی‌ام را توأمی‌ست

Даврӣ андешиданам зон остони номаҳрамии сет

دوری اندیشیدنم زان آستان، نامحرمی‌ست

Оҳ аз он дарё ҷудо гардидаму нгдохтм

آه از آن دریا جدا گردیدم و نگداختم

Чун гуҳар ғалтидани ашками зи дард бе наме сет

چون گهر، غلتیدنِ اشکم ز دردِ بی‌نمی‌ست

Фурсатами токии з беобӣ кашад ранҷи нафас

فرصتم تاکی ز بی‌آبی کشد رنجِ نفس

Сози қулӣоне ки дорад маҷлиси перии дамии сет

سازِ قلیانی که دارد؟ مجلسِ پیری، دمی‌ست

Доғи зери пои вотш бар сар ва дар дидаи ашк

داغ زیرِ پا و آتش بر سر و در دیده اشک

Шамъро дар анҷуман бӯдан чаҳ ҷои хуррамии сет

شمع را, در انجمن بودن, چه جای خرمی‌ست؟

Ҳосили ишғоли маҳфили дӯши пурсидами зи шамъ

حاصلِ اشغالِ محفل، دوش پرسیدم ز شمع

Гуфт : афзӯнии нафас май сӯзаду қисмати камии сет

گفت‌: افزونی نفس می‌سوزد و قسمت کمی‌ست

Сӯхтани миннати гузор чора фармоён мабод

سوختن، منت‌گداز چاره‌فرمایان مباد

Ҷуз ба маҳтобам ба ҳарҷо май нишонеи марҳамии сет

جز به مهتابم به هرجا می‌نشانی، مرهمی‌ست

Бо ду олами ошно зулмаст бе каси зистан

با دو عالم آشنا، ظلم است بی‌کس زیستن

Пеш азин ҳастӣ Ганаҳо дошт акнӯн мубрамии сет

پیش ازین هستی غناها داشت، اکنون مبرمی‌ست

Оташии кўкзи чароғ хомшм гирад хабар

آتشی کو کز چراغِ خامشم‌گیرد خبر

Хомсўзи доғи дилро сӯхтан ҳам марҳамии сет

خام‌سوزِ داغِ دل را، سوختن هم مرهمی‌ست

Ҷуз ба ҳам чидан касеро бо тасарруфи корнист

جز به‌هم‌چیدن، کسی را با تصرف کار نیست

Гандум анбораст ҳар сӯ лек қаҳти одамии сет

گندم انبار است هر سو، لیک قحطِ آدمی‌ست

Халқ дар мӯату ҳаёт аз суфу атласи токФн

خلق در موت و حیات از صوف و اطلس تا کفن

Ҳарчӣ пӯшади зини сиёҳӣу сифедии мотамии сет

هرچه پوشد زین سیاهی و سفیدی، ماتمی‌ست

То абдкўкаст бедили нағмаи сози ҷаҳон

تا ابد کوک است بیدل نغمهٔ سازِ جهان

Авҷи иқболу ҳазизи фақри зерӣу бамии сет

اوجِ اقبال و حضیضِ فقر زیری و بمی‌ست