Гар ҷунунами ҳаваси қатъ манозил ме дошт

گر جنونم هوس قطع منازل می‌داشت

Хуштар аз реги равони обила маҳмил ме дошт

خوش‌تر از ریگ روان آبله محمل می‌داشت

Дидагар рангӣ аз он ҷилва ба рӯ ме оварад

دیده ‌گر رنگی از آن جلوه به رو می‌آورد

Як таҳайюр ба сад ойӣна муқобил ме дошт

یک تحیر به صد آیینه مقابل می‌داشت

Поси ойини адаб гар нашудӣ монеъи ашк

پاس آیین ادب‌ گر نشدی مانع اشک

То ба кӯяши ҳамаи ҷои по ба сар дил ме дошт

تا به کویش همه جا پا به سر دل می‌داشت

Сӯхт парвонаам аз хиҷлати он шамъ ки дӯш

سوخت پروانه‌ام از خجلت آن شمع‌ که دوش

намезад оташ ба худу хотир маҳфил ме дошт

می‌زد آتش به خود و خاطر محفل می‌داشت

эй хуши он шавқ ки аз лиззат бе офиятӣ

ای خوش آن شوق‌ که از لذت بی‌عافیتی

Киштӣам ваҳшати гирдоби з соҳил ме дошт

کشتی‌ام وحشت گرداب ز ساحل می‌داشت

Уқдаи дил агар аз саъии тапиш вомӣ шуд

عقده دل اگر از سعی تپش وامی‌شد

Ҳайрати оинаи ҳам ҷавҳар бсмл ме дошт

حیرت آینه هم جوهر بسمل می‌داشت

Эҳтиёҷ оина шуд номи карам ҷилва фурухт

احتیاج آینه شد نام‌ کرم جلوه فروخت

Хотами ҷӯади нигин дар лаб соил ме дошт

خاتم جود نگین در لب‌ سایل می‌داشت

Шарми ноёбии матлаби арақӣ соз накард

شرم نایابی مطلب عرقی‌ساز نکرد

То раҳи кӯшиши мқсдтлбон гул ме дошт

تا ره‌ کوشش مقصدطلبان ‌گل می‌داشت

Қатъ кардем ба тадбир хамӯшӣ чун шамъ

قطع کردیم به تدبیر خموشی چون شمع

Ҷодаеро ки адаб дар дил манзил ме дошт

جاده‌ای را که ادب در دل منزل می‌داشت

Доғам аз ҳавсилаи шӯхи нигоҳони бедил

داغم از حوصلهٔ شوخ‌نگاهان بیدل

Кош дар базм батон оинаи ҳам дил ме дошт

کاش در بزم بتان آینه هم دل می‌داشت