Дӯш аз бе Меҳрии он ма ғамин будам зиёд
دوش از بی مهری آن مه غمین بودم زیاد
Ногҳм тадбирӣ омад баҳри дидораш ба ёд
ناگهم تدبیری آمد بهر دیدارش به یاد
Сӯй аўгФтм нивисам шарҳи ҳоле то магар
سوی اوگفتم نویسم شرح حالی تا مگر
Аз ғам ҳиҷрам раҳанд созадам аз васли шод
از غم هجرم رهاند سازدم از وصل شاد
Зонкаҳи саррофи сухани андари тарозуии баён
زآنکه صراف سخن اندر ترازوی بیان
Вазни мактуботро як нима аз дидор дод
وزن مکتوبات را یک نیمه از دیدار داد
Аз баёзи чашми коғази ваз мижа кардам қалам
از بیاض چشم کاغذ وز مژه کردم قلم
Сӯхтаи хӯнии мидоди осои дилам дар бар ниҳод
سوخته خونی مداد آسا دلم در بر نهاد
Шарҳи шавқашро ба ҳар ҳарфӣ ки мекардам рақам
شرح شوقش را به هر حرفی که میکردم رقم
Мардуми чашмам ба ҷои нуқтае май аўФтод
مردم چشمم به جای نقطه ای می اوفتاد
Номаамро алФрз доданд чун дар дасти дӯст
نامه ام را الفرض دادند چون در دست دوست
Дида бар рӯйиши кушодам номаамро то кушод
دیده بر رویش گشادم نامه ام را تا گشاد
Васли ёри он ракаи рӯзӣ чун блндоқбол шуд
وصل یار آن راکه روزی چون بلنداقبال شد
Бениёз аз оби вотши омдў аз хоки вабоад
بی نیاز از آب وآتش آمدو از خاک وباد