Ширӣаст ишқ каз бар ӯ кас гузар накард
شیری است عشق کز بر او کس گذر نکرد
То шер дил наомад втои тарк сар накард
تا شیر دل نیامد وتا ترک سر نکرد
Дилбари марои зи ҳасрати лаъли лабони хеш
دلبر مرا ز حسرت لعل لبان خویش
Хӯнӣ дигар намонда ки андар ҷигар накард
خونی دگر نمانده که اندر جگر نکرد
Мижгонии оннигор чу чангол шер дошт
مژگانی آن نگار چو چنگال شیر داشت
Дили шери гир буд ки аз ӯ ҳазар накард
دل شیر گیر بود که از او حذر نکرد
ё бед буд ё ки на бахтами Саид буд
یا بید بود یا که نه بختم سعید بود
Кохри дарахти орзӯии ман самар накард
کاخر درخت آرزوی من ثمر نکرد
Оҳани магар на оби зи оташ ҳаме шавад
آهن مگر نه آب ز آتش همی شود
Пас оҳи мо чаро ба дил ӯ асар накард
پس آه ما چرا به دل او اثر نکرد
Чашмати зи мижа бо дили ман ончӣ мекунад
چشمت ز مژه با دل من آنچه میکند
Фсод бо раг касе аз нештар накард
فصاد با رگ کسی از نیشتر نکرد
Дидӣ ки шамъ чун пари парвонаро бсухт
دیدی که شمع چون پر پروانه را بسوخت
Худ ҳамчунон бсухт ки шабро саҳар накард
خود همچنان بسوخت که شب را سحر نکرد
Зоҳиди нигар ки гуфт чунин вчнонм кунам
زاهد نگر که گفت چنین وچنانم کنم
Ҳеҷ эътино ба ҳукми қазо вқдр накард
هیچ اعتنا به حکم قضا وقدر نکرد
Дар ошиқӣ чу ман нашуд иқболи каси баланд
در عاشقی چو من نشد اقبال کس بلند
То тан ба пеши бори маломат сипар накард
تا تن به پیش بار ملامت سپر نکرد