Бо зулфат аз бўҳмсрӣ чун машк тоторӣ кунад

با زلفت از بوهمسری چون مشک تاتاری کند

Рухсораи тории зоин гунаҳ дар нофааш торӣ кунад

رخساره تاری زاین گنه در نافه اش تاری کند

Гуфтӣ ба чашми масти худтои дили зи ҳушёрони барад

گفتی به چشم مست خودتا دل ز هشیاران برد

Чашми тўнгзорд ки каси як лаҳза ҳушёрӣ кунад

چشم تونگذارد که کس یک لحظه هشیاری کند

Ман порсоем эй писар шавам тарсои зи бас

من پارسایم ای پسر شوم ترسا ز بس

Каз росту зи чапи зулфи ту бар дӯш зуннорӣ кунад

کز راست و ز چپ زلف تو بر دوش زناری کند

Дар пеши чашмат кӣ кунад қассоби қассобӣ дигар

در پیش چشمت کی کند قصاب قصابی دگر

ё бо вуҷӯди зулфи ту аттор атторӣ кунад

یا با وجود زلف تو عطار عطاری کند

Нашунидае кандар ҷаҳон бошад мукофотии магар

نشنیده ای کاندر جهان باشد مکافاتی مگر

Хуят чаро бо мо чунин доими дил озорӣ кунад

خویت چرا با ما چنین دایم دل آزاری کند

Дар зери бори ғами дилам чун бахтии масти омада

در زیر بار غم دلم چون بختی مست آمده

Бахтии чўмсти оидкҷои бок аз гронборӣ кунад

بختی چومست آیدکجا باک از گرانباری کند

зи он чеҳри шингарфӣ буд ашкам ба рухи шингарфи гаван

ز آن چهر شنگرفی بود اشکم به رخ شنگرف گون

Рўзмрои нилии сифати он хат зангорӣ кунад

روزمرا نیلی صفت آن خط زنگاری کند

Дарё шавад рӯй замини тӯфон Нӯҳ ояд падед

دریا شود روی زمین طوفان نوح آید پدید

Ар чашмро рухсати даҳум то ашкро ҷорӣ кунад

ار چشم را رخصت دهم تا اشک را جاری کند

Афғони баланди иқболи чндозҳҷри дории рӯзу шаб

افغان بلند اقبال چندازهجر داری روز و شب

Охир шавад рӯзии висоли иқболат ар ёрӣ кунад

آخر شود روزی وصال اقبالت ار یاری کند