Ман паии дилбар ваовро бар дили манзил буд

من پی دلبر و او را بر دل منزل بود

Дили биҳуши марои байн чаҳ аҷаби ғофил буд

دل بیهوش مرا بین چه عجب غافل بود

Тӯҳфае аз дили вҷон дар брҷонони барадам

تحفه‌ای از دل و جان در بر جانان بردم

Лек мақбул науфтод ки ноқобил буд

لیک مقبول نیفتاد که ناقابل بود

« шарбатӣ аз лаби лаълаши нчшидими охир »

«شربتی از لب لعلش نچشیدیم آخر»

Кӯшиши мо вдли мо ҳамаи биҳосл буд

کوشش ما و دل ما همه بی‌حاصل بود

Охири андари хами зулфи тавба занҷир афтод

آخر اندر خم زلف تو به زنجیر افتاد

Дил ки девона шуд аз ишқи рахти оқил буд

دل که دیوانه شد از عشق رخت عاقل بود

Бе гунаҳи турраи таррори тўондр банд аст

بی‌گنه طره طرار تو اندر بند است

Тарки мастати дили мискини марои қотил буд

ترک مستت دل مسکین مرا قاتل بود

Дил ба дил дорад агар роҳ чаро пас дили ман

دل به دل دارد اگر راه چرا پس دل من

Моили меҳри вдли ту ба ҷафои моил буд

مایل مهر و دل تو به جفا مایل بود

Зоҳиди шаҳр ки медод з май тавба ба мо

زاهد شهر که می‌داد ز می توبه به ما

Кор ӯ буд риёи вълмши ботил буд

کار او بود ریا و علمش باطل بود

Дӯши дидем ба майхона ба пои хам май

دوش دیدیم به میخانه به پای خم می

Масти афтода чаҳ лоишъри влоиъқл буд

مست افتاده چه لایشعر و لایعقل بود

намешудам шуҳраи олам ба блндоқболӣ

می‌شدم شهره عالم به بلنداقبالی

Илтифоти ту ба ҳоли дилам ар шомил буд

التفات تو به حال دلم ار شامل بود